लखीमपुर खीरी। झांसी मेडिकल कॉलेज में हुई घटना के बाद सरकारी व निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा संबंधी इंतजामों की पड़ताल तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ाें में जिले में तकरीबन सौ ऐसे निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। जहां मरीज भर्ती किए जाते हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग की एनओसी सिर्फ 70 निजी अस्पतालों के पास है।
जिले में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम मुहल्लों तक में खुल गए हैं। कई अस्पताल भवनों के बेसमेंट में तो कई दो-तीन दुकानों को जोड़कर बनाए गए हॉल में चल रहे हैं। मानकों को दरकिनार कर धड़ल्ले से चल रहे इन अस्पतालों पर मुकम्मल कार्रवाई नहीं हुई, पर झांसी की घटना के बाद अब जांच हो रही है।
ऐसे में यहां स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत अस्पतालों का मुद्दा भी उठा है। विभागीय आंकड़ों के हिसाब से जिलेभर में मरीजों को भर्ती करने वाले 100 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। इसमें यह सवाल तो पहले से उठ रहा था कि गली-मुहल्लों तक में खुले निजी अस्पतालों में मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, पर पंजीकरण महज 100 का है। अब अग्निशमन विभाग के आंकड़े सामने आने के बाद मामला काफी गंभीर हो गया है। जब अग्निशमन विभाग के आंकड़े खंगाले गए ताे महज 70 निजी अस्पतालों के पास ही अग्निशमन विभाग की एनओसी होना बताया गया।
अव्यवस्थाओं पर 20 निजी अस्पतालों को नोटिस
झांसी में हुई घटना के बाद 17 और 18 नवंबर को अग्निशमन विभाग की टीम ने जिले भर में निजी अस्पतालों में इंतजामों की पड़ताल की। इसमें अब तक कुल 20 अस्पतालों को अव्यवस्थाएं मिलने पर नोटिस दिया गया है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा का कहना है कि जांच में कमियां पाए जाने पर कार्रवाई की जा रही है। एनओसी के बगैर अस्पतालों का पंजीकरण कैसे हो गया, इसमें स्वास्थ्य विभाग ही कार्रवाई कर सकता है।
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अग्निशमन विभाग की एनओसी जिन अस्पतालों के पास नहीं है, उनकी जानकारी कराई जा रही है। कैसे इनका पंजीकरण हो गया, यह जांच की जाएगी। इस गंभीर विषय में जिसकी भी लापरवाही होगी, कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ