थाना क्षेत्र के चतुरापुर गांव में फाल्ट ठीक करते समय एचटी लाइन से बुरी तरह झुलसे संविदाकर्मी की नौ दिन बाद लखनऊ में उपचार के दौरान मौत हो गई। जिसके बाद पुलिस ने उसके चाचा की तहरीर पर इलाकाई एसडीओ, जेई समेत चार लोगों के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया है।
त्रिकोलिया गांव निवासी तिलक सिंह का पुत्र अंकित पांच सितंबर को चतुरापुर गांव में एचटी लाइन में आए फाल्ट को ठीक करने के लिए गया था, जहां अचानक करंट आने से वह बुरी तरह झुलस गया था। जिसके बाद उसे लखनऊ में भर्ती कराया गया। नौ दिन जिंदगी और मौत से जूझने के बाद रविवार को उसकी मौत हो गई। इस मामले में एसओ जावेद अख्तर ने बताया कि मृतक के चाचा संजय सिंह की तहरीर पर एसडीओ मुकेश कुमार, जेई मनीष चंद्रा, एलटी लाइन के ठेकेदार वीएम शाहू के अलावा घटना के समय मुबारकपुर सब स्टेशन पर तैनात बिजलीकर्मी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिसकी जांच शुरू कर दी गई है।
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अंकित के कंधों पर ही थी परिवार की जिम्मेदारी
मैगलगंज। अंकित की मौत के बाद से ही पूरा परिवार बेहाल है। परिवारीजनों के मुताबिक भूमिहीन तिलक सिंह का सबसे बड़ा बेटा अंकित ही परिवार का सारा बोझ उठा रहा था। अंकित के अलावा दूसरा पुत्र अंकुर और चार बेटियां पूनम, रूबी, अर्चना एवं रजनी भी है। अंकित की मौत के बाद परिवार की कमर ही टूट गई है।
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बिजली अधिकारी झाड़ लेते हैं पल्ला
मुबारकपुर, चुरईपुरवा उपकेंद्र क्षेत्र में करीब 300 गांवों की बिजली सप्लाई जुड़ी है। लेकिन बिजली विभाग के पास इन गांवों की सप्लाई दुरुस्त करने के लिए एक भी सरकारी लाइनमैन नहीं है। पूरी व्यवस्था संविदा कर्मचारियों के सहारे चल रही है। ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाता है तो बिजली अधिकारी भी संविदाकर्मियों को अपना कर्मचारी मानने से इंकार कर देते हैं। मुबारकपुर व चुरईपुरवा उपकेंद्र पर करीब दो दर्जन से अधिक संविदा कर्मचारी तैनात हैं। लेकिन अधिकारी इनसे सिर्फ काम ही लेते हैं। बता दें कि दो साल पहले अनुज सक्सेना नामक संविदाकर्मी ट्रांसफार्मर से गिरकर गंभीर घायल हो गया था। वहीं 30 दिसंबर 2014 को लाइन ठीक करते समय प्रमोद गौतम और ग्यारह हजार लाइन की चपेट में आकर पुष्पेंद्र यादव की मौत हो गई थी। फिर भी विभाग ने इन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया।