लगातार चढ़ता पारा लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। भीषण गर्मी
और कड़ी धूप से पूरा जिला बिलबिला उठा है। गर्मी के कारण लोगों की
कार्यक्षमता घटकर आधी रह गई है। सुबह से ही आसमान से आग बरसना शुरू होने से
लोग बाहर निकलने से कतराने लगे हैं। इसके चलते बृहस्पतिवार को दोपहर में
सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
भीषण गर्मी के कारण लोग हल्के और
कम से कम कपड़े पहनना चाहते हैं लेकिन कड़ी धूप से बचाव के लिए लोगों को
कपड़ों से पूरा बदन ढक कर निकलना पड़ रहा है। सुबह चलने वाली ठंडी हवाएं
दोपहर होते-होते लू में तब्दील हो गई। बाहर निकलने पर लू के थपेड़े लोगों
की त्वचा को झुलसा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस साल मई में जितनी गर्मी
पड़ रही है उतनी इससे पहले कभी नहीं पड़ी। लोग दिन में ही नहीं रात में भी
बेहाल रहे। गर्मी के कारण लगातार दिक्कतें बढ़ रही हैं।
दफ्तरों में
काम करने वाले लोग तो किसी तरह पंखा-कूलर के सहारे गर्मी से मुकाबला कर
लेते हैं लेकिन फील्ड वर्क करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों और रिक्शा
चालकों पर यह गर्मी भारी पड़ रही है। भीषण गर्मी के कारण लोग कम से कम
सड़कों पर निकल रहे हैं। इससे रिक्शा चालकों को सवारियां नहीं मिल रही हैं।
यदि सवारियां मिल भी गईं तो रिक्शा खींचने में ही आफत आ जाती है। कुछ यही
हाल पल्लेदारों और इमारत बनाने में काम करने वाले मजदूरों का भी है।
बृहस्पतिवार
को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस
रिकार्ड किया गया। सुबह से ही कड़ी धूप रही। ज्यों-ज्यों समय बीतता गया
तापमान में बढ़ातरी होती गई। दोपहर में तो इतनी गर्मी थी कि लोग बिलबिला
उठे। लोग घरों और दफ्तरों से निकलकर पेड़ों की छाया तलाश करने लगे। इंसान
ही नहीं पशु पक्षी भी छाया तलाशते दिखे।
बुधवार की शाम आसमान में
बादलों के घिरने से लोगों को बारिश की उम्मीद दिखी थी लेकिन रात करीब नौ
बजे केवल बूंदाबांदी के बाद आसमान साफ हो गया। न आंधी आई न पानी बरसा।
उल्टे गर्मी और ज्यादा बढ़ गई। इन दिनों सैकड़ों लोग गर्मी जनित बीमारियों
से पीड़ित हैं। अस्पतालों और प्राइवेट चिकित्सकों के यहां मरीजों की भीड़
उमड़ रही है।