बाकेगंज में कर्षि फार्म पर फसल देखते तमिलनाडु से आए उद्यान अधिकारी।
बांकेगंज, पलिया, महेवागंज में खेती में हो रहे प्रयोग देखे
अधिकारी बोले, अपने यहां भी लागू कराएंगे यह पैटर्न
लखीमपुर खीरी। जिले में मुख्य फसलों के साथ सहफसली खेती के विविध प्रयोगों का जायजा लेने के लिए तमिलनाडु के छह उद्यान अधिकारी इन दिनों आए हुए हैं। बृहस्पतिवार को अधिकारियों ने बांकेगंज, पलिया, महेवागंज आदि स्थानों का दौरा किया। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर नफा-नुकसान भी जाना। अधिकारियों का कहना था कि वह खीरी के पैटर्न पर तमिलनाडु में भी सहफसली खेती का फार्मूला अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
उप कृषि निदेशक योगेश प्रताप सिंह व जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी की अगुवाई में तमिलनाडु से आए उद्यान विभाग के अधिकारियों ने सबसे पहले बांकेगंज में यदुनंदन तिवारी उर्फ पुजारी के कृषि फार्म का दौरा किया। यहां पर मुख्य फसलों के साथ की जा रही सहफसली खेती जैसे स्ट्राबेरी के साथ लहसुन व केला के साथ फूलों की खेती को देखा। अधिकारियों ने किसान पुजारी से इससे होने वाली आय के बारे में जानकारी ली।
इसके बाद पलिया में किसान कमलजीत सिंह के अमरूद बाग का निरीक्षण किया, जहां पर अमरूद के साथ ही लीची की पैदावार की जा रही है। कम जगह में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों पर चर्चा हुई। महेवागंज में अनुराग अग्रवाल द्वारा किए जा रहे मशरूम के उत्पादन का जायजा लिया। मशरूम की खेती कम जगह व कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाला कारोबार नजर आया। तमिलनाडु से आए अधिकारियों के दल में उद्यान विभाग की उप निदेशक पी विमला, एम भुवनेश्वरी, सहायक निदेशक जी प्रभा, एस सुरेश, उद्यान अधिकारी एम दिव्या प्रभा व एम मनीशा शामिल रहे।