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बेरौनक जिंदगी में रंग भरने की तैयारी

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लखीमपुर वृद्धाव्स्था आश्रम में बैठे वृद्धजन। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। होली पर अपनों के साथ खुशियां मनाना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन हमारे आसपास कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनों के साथ के लिए तरस रहे हैं। उनकी खुशियां रूठी हुई सी हैं। जिले में समाज की मुख्यधारा से कटे ऐसे आवासीय परिसरों में रहने वाले बेसहारा लोगों की बेरौनक जिंदगी में रंग भरने की तैयारी की जा रही है। कहीं गुझिया का इंतजाम किया जा रहा है तो कहीं रंग-गुलाल का।
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सलेमपुर कोन में संचालित वृद्धावस्था आश्रम में 85 बुजुर्ग अपनी बची हुई जिंदगी गुजार रहे हैं। इनमें 38 महिलाएं और 47 पुरुष हैं। होली नजदीक है, लेकिन किसी के परिजन उन्हें घर जे जाना तो दूर हाल-चाल लेने भी नहीं आए। लिहाजा वृद्धावस्था आश्रम के संचालकों पर ही इनकी त्योहारी खुशियां निर्भर हैं। धौरहरा क्षेत्र के शाहपुर निवासी रामदेवी एक माह पहले वृद्धावस्था आश्रम पहुंची थीं। उनके चार बेटे हैं, लेकिन कोई उन्हें साथ रखने को तैयार नहीं है। शहर के मोहल्ला गंगोत्रीनगर निवासी पुत्तूलाल डेढ़ साल से यहां रह रहे हैं। उनके बेटे की मौत हो चुकी है, जिससे परिवार में बहू और तीन पोतियां हैं। घर में खाना न मिलने पर पुत्तूलाल को वृद्धाश्रम की शरण लेनी पड़ी।
मोहल्ला हाथीपुर कोठार निवासी माधुरी शर्मा चार साल से यहां रह रही हैं। उनके दो पुत्र थे, जिनमें एक पुत्र की मौत हो चुकी है और एक पुत्र कहीं चला गया है। लिहाजा उन्हें भी आश्रम आना पड़ा। मितौली क्षेत्र के गांव रमुआपुर निवासी रामदयाल दो साल से आश्रम में हैं। उनका एक बेेटा है, जिसके दुर्घटना में घायल होने पर इलाज कराने में मकान बिक गया। पत्नी की मौत हो चुकी है। बेटा भी कहीं चला गया है।
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वृद्धावस्था आश्रम में 85 बुजुर्ग रह रहे हैं। सभी का पूरा ख्याल रखा जाता है। त्योहार पर गुझिया और रंग की व्यवस्था की गई है। सरकार की ओर से होली को लेकर कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाती है। संस्था और प्रशासन के प्रयासों से आवश्यक सामग्री जुटाई जाती है।
-एसबी सिंह, प्रबंधक, वृद्धावस्था आश्रम
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उदास चेहरों पर रंगों से आएगी रौनक
पलियाकलां। शहर की निघासन रोड स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वाधार गृह में बेसहारा महिलाओं के उदास चेहरों पर रौनक लाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल यहां 13 सदस्य रह रहे हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। उनको घर जैसा माहौल मिले, इसलिए प्रबंधन ने इस होली पर रंग-गुलाल का तो इंतजाम किया ही है। साथ ही उन्हें नए कपड़े भी दिए जाएंगे। यहां होली पर विशेष पकवान भी बनेंगे। वार्डेन रूखसार बी का कहना है कि इस बार रंग-गुलाल खेलने के साथ ही नए कपड़े भी दिए जाएंगे। संवाद
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