पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। पार्क प्रशासन ने तीन गैंडों को पकड़कर खुले जंगल में सफलतापूर्वक छोड़ दिया। इससे पहले दो चरणों में चार गैंडों को आजाद किया जा चुका है।
22 मार्च से शुरू हुए गैंडा पुनर्वास अभियान के तीसरे चरण के पहले दिन टीम को सफलता नहीं मिली थी। छंगा नाला स्थित दूसरी गैंडा परियोजना में सुबह से प्रयास के बावजूद गैंडों की लोकेशन नहीं मिल सकी और टीम को लौटना पड़ा।
अगले दिन 23 मार्च को टीम फिर सक्रिय हुई और पहले ही हाफ में सफलता मिली। एक नर गैंडा ‘हर्ष’ और एक मादा गैंडे को हाथियों की मदद से घेराबंदी कर ट्रैंकुलाइज किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में एक और मादा गैंडे को रेस्क्यू किया गया।
पद्मश्री डॉ. केके शर्मा के नेतृत्व में विशेषज्ञों और स्थानीय पशु चिकित्सकों की टीम ने तीनों गैंडों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें रेडियो कॉलर पहनाए और दुधवा के एसडी सिंह मचान के पास खुले जंगल में छोड़ दिया।
पिछले दो दिनों से लगातार काम कर रहे राजकीय हाथियों की थकान को देखते हुए आगे की कार्रवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी गई है। रेडियो कॉलर के माध्यम से अब इन गैंडों की निगरानी की जाएगी।
पहली परियोजना से मिली सफलता
22 मार्च को टीम ने छंगा नाला स्थित दूसरी गैंडा परियोजना में प्रयास किया, लेकिन वहां कोई गैंडा नजर नहीं आया। इसके बाद 23 मार्च को टीम ने सलूकापुर स्थित पहली परियोजना में अभियान चलाया, जहां गैंडों की संख्या अधिक होने से सफलता मिली।
24 मार्च को होगा एक और गैंडे का रेस्क्यू
गैंडों को खुले जंगल में छोड़ने के अभियान के तहत 24 मार्च को एक और गैंडे को रेस्क्यू किया जाएगा। छह गैंडों को आजाद करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि रेडियो कॉलर की सीमित उपलब्धता के चलते अभियान चरणबद्ध तरीके से चल रहा है।