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‘भिखारी ठाकुर के साहित्य में अंधविश्वास का विरोध’

Fri, 19 Dec 2014 08:02 PM IST
लखीमपुर खीरी
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राष्ट्रभाषा हिंदी के विकास में जो स्थान भारतेंदु हरिश्चंद का है वही स्थान भोजपुरी साहित्य में भिखारी ठाकुर का है। उनके साहित्य में सामाजिक कुरीतियाें और अंधविश्वासाें का मुखर विरोध दिखाई देता है। यह विचार सत्य प्रकाश शिक्षक ने अनंतराम इंटर कॉलेज में पद्मश्री भिखारी ठाकुर जयंती समारोह में विजयी प्रतिभागियाें को पुरस्कृत करते हुए व्यक्त किए।
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कार्यक्रम का शुभारंभ यदुनंदन ठाकुर ने पद्मश्री भिखारी ठाकुर के  चित्र पर माल्यार्पण कर किया। अखिल भारतीय नाई महासभा के तत्वावधान में हुई निबंध प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में नूरजहां ने प्रथम, तजत्तरून ने द्वितीय तथा मुकेश ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार कनिष्ठ वर्ग में कीर्ति श्रीवास्तव प्रथम, शालू वर्मा द्वितीय, मोहिनी तीसरे स्थान पर रहे।
इसी क्रम में कला प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में मंतशा बानो प्रथम आरती श्रीवास्तव द्वितीय तथा आशी पांडेय ने तृतीय स्थान पाया। शिशु वर्ग की कला प्रतियोगिता में प्रियंका ने प्रथम, लक्ष्मी वर्मा ने द्वितीय तथा अनुराधा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार सुलेख में नैंसी प्रथम सोहनी द्वितीय तथा शुभी तीसरे स्थान पर रहीं।
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कार्यक्रमों में शिक्षक अंकुश कुमार, दुर्गाचरण, शिक्षिका बिटोली देवी, सावित्री गुप्ता का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर नंदकिशोर, अरविंद कुमार, रवींद्र्र कुमार श्रीवास्तव, रवीश कुमार, राधा ठाकुर आदि ने 18 दिसंबर को जन्मे भिखारी ठाकु र के जन्मदिन को विश्व भोजपुरी दिवस के रूप में मनाए जाने की मांग की।
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