फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘भारतीय संस्कृति की समग्र चेतना को साकार करने वाली जनवाणी है हिंदी’

विज्ञापन
विज्ञापन
मोहम्मदी। हिंदी, भारतीय अस्मिता की पहचान है। यह भारतीय संस्कृति की समग्र चेतना को साकार करने वाली जनवाणी हैं लेकिन राजनीति के दलदल ने हिंदी की प्रगति यात्रा अवरुद्ध की है। इस दलदल से छींटे हिंदी के आंचल पर उछाले जा रहे हैं। हिंदी के चारों ओर राजनीतिक प्रश्नों की बाड़ खड़ी की गई है जिससे हिंदी भाषा का संस्कार क्षय हो रहा है। सभी वर्गों से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसे में अमर उजाला का ‘हिंदी हैं हम’ अभियान साधुवाद का पात्र है।
विज्ञापन

हिंदी भाषा मात्र अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं स्वयं की भी अभिव्यक्ति है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चेतना संस्कृति एवं संबंधित मूल तत्व हिंदी के माध्यम से प्रचारित और सुग्राहय बन सकते है। इसके लिए हमें स्वयं हिंदी का सम्मान करना होगा। अपने गांवों को हिंदी के माध्यम से व्यक्त करें। सरकार भी पंचवर्षीय योजनाओं में समुचित राशि और संसाधनों की अधिकतम व्यवस्था कर रही है।
-संतोष कुमार त्रिवेदी, पूर्व प्रधानाचार्य सरस्वती विद्या मंदिर, मोहम्मदी
हिंदी समाज और देश को जोड़ने का माध्यम है। इसमें आदमी को आदमी से जोड़ने की कला है। अंग्रेजी के युग में इसकी अस्मिता की रक्षा के लिए हर भारतीय को आगे आना होगा। इस प्रयास में कोई मजहब, जाति, धर्म नहीं आना चाहिए तभी इसका सत्यम, शिवम और सुंदरम का स्वरूप निखर सकेगा।
विज्ञापन

-प्रीति सिंह, प्रधानाचार्य स्वामी रामाश्रम इंटर कॉलेज, मोहम्मदी
हिंदी की उपेक्षा पर कुछ पंक्तियां प्रस्तुत करते हुए छात्रा आशा पाल ने कहा-
सूर की राधा दुखी, तुलसी की मीरा रो रही है।
है खड़ा सहमा कबीरा और मीरा सो रही है।
ये हवा पश्चिम की विष के बीज कैसे बो रही है।
आज अपने देश में हिंदी उपेक्षित हो रही है।
-आशा पाल, छात्रा बीए गांव मगरेना, मोहम्मदी
हिंदी न केवल आत्मीयता और प्रेम की भाषा है बल्कि हमारी राजभाषा भी है। लेकिन अफसोस है कि अपने ही देश में हिंदी तिरस्कृत होकर रह गई है। तब दुख होता है जब एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में बच्चे को इसलिए सजा दी जाती है क्योंकि उसने हिंदी में बात की थी। ऐसे में कहा जा सकता है
मैं सिसकती चंद पन्नों पर मेरा अस्तित्व है।
मैं अब गोष्ठी और दिवस पर सिमट कर रह गई।
मिट गया गौरव मेरा, मैं राष्ट्र भाषा देश की,
हो उपेक्षित अपनों से तिरस्कृत रह गई।
-रजनी सैनी, कवयित्री, मोहम्मदी
पूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक स्वतंत्रता के लिए ‘हिंदी’ का शुद्ध प्रयोग महत्वपूर्ण है। इसका सर्वोत्तम उदाहरण हिंदी भाषा का शब्द ‘भारत’ है जिसको कहने से राष्ट्र-बोध होता है। प्रत्येक राष्ट्र की अस्मिता उसकी राष्ट्र भाषा से जीवित रहती है।
-अमित भसीन, प्रमुख समाज सेवी, मोहम्मदी
एक भाषा के रूप में हिंदी भारत की पहचान है। यह विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। अब लोग हिंदी जानते हुए भी इसे बोलने में हिचकने लगे हैं। इसलिए हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकार को आगे आकर इसके प्रचलन के लिए उचित माहौल तैयार करना चाहिए। हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार से ही देश में एकता की भावना और मजबूत होगी।
विज्ञापन

-हरवेंद्र सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, गन्ना किसान महाविद्यालय बहादुुर नगर, मोहम्मदी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें