लखीमपुर खीरी। सर्दियों के मौसम में शाम होते ही कोहरा गिरना शुरू हो जाता है। इसके कारण जिले में करीब 45 फीसदी सड़क हादसे बढ़ जाते हैं। सबसे अधिक खतरा राष्ट्रीय राजमार्ग और स्टेट हाईवे पर होता है। रास्ता साफ नजर नहीं आने के बावजूद लोग वाहन तेज रफ्तार में चलाते हैं।
सर्दी के मौसम में शाम से ही कोहरे की धुंध सड़कों पर इस तरह छा जाती है कि पास का भी दिखना मुश्किल हो जाता है। इससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है। जिले में नेशनल-स्टेट हाईवे पर 19 ब्लैक स्पॉट और 85 असुरक्षित मोड़ हैं। कोहरे की धुंध छाने के कारण रास्ते साफ नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में वाहन सवारों के लिए जरा सी लापरवाही उनके लिए काल बन सकती है। जिले में सड़क हादसे में हर साल मौत का ग्राफ बढ़ रहा है लेकिन इस साल लॉकडाउन के कारण हादसों में गिरावट आई है। टीएसआई सूर्यमणि यादव ने बताया कि करीब छह वर्षों में 1743 लोगों की जान सड़क हादसे में चली गई, इनमें प्रतिवर्ष करीब 45 फीसदी हादसे कोहरे के कारण होते हैं।
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कोहरे में बढ़ जाती है हादसों की संख्या
ग्रामीण क्षेत्रों के संपर्क मार्गों पर भी खतरे की आशंका कम नहीं रहती है। रास्ता साफ नजर नहीं आने के बावजूद लोग वाहन तेज रफ्तार में चलाते हैं। कुछ लोग तो पीली लाइट एवं इंडीकेटर का भी उपयोग नहीं करते हैं। जब घना कोहरा पडने लगे तो सावधानी बेहद आवश्यक है। परिवहन विभाग और पुलिस समय समय पर जागरुकता अभियान चलाती है, लेकिन हादसे में कमी नहीं आ रही है।
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छह वर्षों के दौरान हुए हादसे
वर्ष हादसों की संख्या मृतक घायल
2015 387 291 158
2016 492 328 219
2017 517 364 242
2018 570 358 265
2019 612 347 291
2020 296 55 197 (अक्तूबर माह तक)
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सर्वाधिक दुर्घटना वाले 14 नए ब्लैक स्पॉट चिह्नित
वर्ष 2019-20 में सर्वाधिक सड़क दुर्घटना वाले 14 नए ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिसमें 10 पीडब्ल्यूडी और चार ब्लैक स्पॉट एनएचएआई के अधिकार क्षेत्र में पड़ते हैं। इन ब्लैक स्पॉटों पर भी सड़क सुरक्षा कार्यक्रम के तहत साइन बोर्ड, रबड स्ट्रिप, रिपीटैड बार और जेब्रा क्रासिंग आदि कार्य कराए जाएंगे। यह ब्लैक स्पॉट निर्माण खंड एक के बेलरायां-पनवारी राज्य मार्ग पर एक, सिसैया, धौरहरा, निघासन, पलिया, धनौराघाट-पूरनपुर मार्ग पर दो, लखीमपुर-शारदानगर मार्ग पर एक ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। जबकि निर्माण खंड तीन के क्षेत्र में पड़ने वाले सिसैया, धौरहरा, निघासन, पलिया, धनौराघाट-पूरनपुर मार्ग पर छह ब्लैक स्पॉट मिले हैैं। निर्माण खंड एक ने अपने क्षेत्र के ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य कराया है, जबकि निर्माण खंड तीन को छह ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य कराना शेष है। इसके अलावा एनएचएआई के क्षेत्र में रेलवे क्रासिंग कस्बा मैलानी (एनएच 731), रपटा पुल बहाड़ ग्राम भीरा (एनएच 731), अटरिया रेलवे क्रासिंग शारदा पुल के पास (एनएच 731) और एनएच खंड एक के अहमदनगर (एनएच 730) पर नए ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं।
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इन वजहों से हो रहीं सड़क दुर्घटनाएं
-अधिकतर सड़कों पर साइन मार्किंग नहीं।
-जल्दी पहुंचने के चक्कर में वाहन चालक ओवरटेक करते हैं।
-सड़क निर्माण में कुछ खामियां हो जाती है। बड़े हाईवे में जब छोटी सड़क मिलती है तो उससे 100 मीटर पहले संकेतक बोर्ड पर सूचना लिखनी चाहिए। चार से पांच ब्रेकर बनाने चाहिए।
-रेडियम लगाने में बरती जाने वाली लापरवाही।
-अधिकतर लोग हेलमेट और सीट बेल्ट लगाकर नहीं चलते। दुर्घटना होने पर हेड इंजरी का शिकार बन जाते हैं।
-सड़कों की खराब हालत भी जिम्मेदार है।
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यह हैं असुरक्षित मोड़
महेवागंज उल्ल नदी पुल, टेढुई मोड़, खंभारखेड़ा मोड़, पतरासी मोड़, चकई पुल, मल्लबेहड़, घोसियाना, सिद्ध बाबा मोड़, निबौरिया मोड़, बंजरिया पुल मोड़, मझगई पुल मोड़, दुबहा, बम्महनपुर, चोरही बगिया, लगुचा मोड़, छाउछ चौराहा, लालपुर चौराहा, आंवला जंगल मोड़ आदि
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यातायात नियमों की अनदेखी के कारण हादसे अधिक हो रहे हैं। कोहरे के दौरान वाहन चालकों को सतर्कता बरतनी होगी। दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट और कार चालकों को सीटबेल्ट का प्रयोग करें। पुलिस व परिवहन विभाग अभियान चलाकर लोगों को जागरूक भी कर रहा है। नियम का उलंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
-विजय ढुल, एसपी