- गम के सैलाब में डूबा रहा मझगईं
- दिलशाद का देर सायं तक नहीं पहुंचा शव, आज होगा सुपुर्दे खाक
मझगईं का माहौल रविवार और सोमवार काफी गमगीन रहा। रविवार की देरशाम मझगईं से अग्निकांड में जलकर मरे यासीन और उनकी पत्नी आशिमा का जनाजा उठा तो शनिवार की सुबह अजय और विजय की अर्थी। पति-पत्नी को कस्बे के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया तो वहीं दोनों भाईयों का कस्बे के शमशान घाट में संस्कार हुआ। इस दौरान पूरा मझगईं गम के सैलाब में डूबा रहा और लोगों की आंखें नम रहीं। दिलशाद का शव सोमवार को देरशाम आने की संभावनाएं है, इसके चलते माना जा रहा है कि उसको मंगलवार को ही सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
गौरतलब है कि शनिवार को दोपहर में मझगईं निवासी यासीन जो कि आतिशबाज थे और लाइसेंसधारक आतिशबाजी निर्माता भी। उनके घर अचानक आतिशबाजी से आग लग गई और तेज धमाके के बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते आग ने पास पड़ोस के छह और घरों को जलाकर खाक कर दिया। यासीन की पत्नी तेज धमाके में उड़कर दूसरे के घर जा गिरीं और उनका शव बरामद हुआ। इसके अलावा हादसे में यासीन, उनका पुत्र दिलशाद, नौकर अजय और विजय बुरी तरह झुलस गए। हादसे में अजय, विजय, यासीन और दिलशाद की भी अस्पताल में मौत हो गई थी। कुछ ही घंटों में एक परिवार के तीन सदस्य और एक परिवार को दो सदस्य दुनियां छोड़कर चले गए। इन मौतों से उनके घरवालों में कोहराम मच गया। यासीन और उनकी पत्नी आशिमा, अजय और उसके भाई विजय के शव रविवार को ही घर पहुंच गए। जिसके बाद मंजर और भी गमगीन हो गया और घरवाले मातम में डूब गए, जिसे देख अन्य लोगों की भी आंखें नम हो गईं। रविवार की देरशाम यासीन और आशिमा को गमगीन माहौल में कस्बे के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। दिलशाद का शव सोमवार की देरशाम आने की उम्मीद जताई जा रही है और इसके चलते उसको मंगलवार को दफनाने की संभावनाएं हैं। उधर, रविवार को देर हो जाने के चलते अजय और विजय का संस्कार कस्बे के शमशान घाट में सोमवार की सुबह किया गया।
पास-पास बनाई गईं दंपत्ति और उनके पुत्र की कब्र
यासीन और उनकी पत्नी आशिमा की कब्र पास-पास बनाई गई है तो उनके पैरों के पास दिलशाद के लिए कब्र खोदी गई है। यासीन और आशिमा तो इसमें दफन हो चुके हैं, लेकिन दिलशाद को अभी दफनाना है।
18 साल के नफीस के ऊपर भाई-बहनों का जिम्मा
यासीन उनकी पत्नी आशिमा और पुत्र दिलशाद की अग्निकांड में मौत के बाद घर में अब 18 साल का नफीस ही सबसे बड़ा है। इसके बाद 16 साल का नाजिम, करीब दस साल की सानिया और पांच साल का रजा गुलजार ही बचे हैं। इसके चलते अब नफीस पर अपने दो भाईयों और एक बहन का जिम्मा आ गया है। यासीन के पास यूं तो करीब छह बीघा जमीन भी है, लेकिन मुख्य व्यवसाय आतिशबाजी ही थी। इतनी जमीन में घर के खर्च पूरे नहीं हो सकते थे, सो इसलिए वह सभी आतिशबाजी पर ही निर्भर थे।
पुश्तैनी कारोबार बढ़ेगा आगे या फिर होगा बदलाव
इस हादसे के बाद पुश्तैनी कारोबार आतिशबाजी को लेकर चर्चाएं हो रहीं हैं। अब देखना है कि बच्चे मां बाप और भाई की जिंदगी निगल चुके इस पुश्तैनी कारोबार पर निर्भर रहते हैं या फिर इसमें कोई बदलाव करेंगे। फिलहाल लोगों की राय है कि उनको इस कारोबार को बंद कर देना चाहिए।
बसपा और सपा प्रत्याशियों ने बंधाया ढांढ़स
संस्कार के दौरान बसपा प्रत्याशी और पूर्व डिप्टी सीएमओ डॉ. वीके अग्रवाल पहुंचे और घरवालों को ढांढस बंधाया। साथ ही हर संभव मदद हमेशा करने का आश्वासन दिया। वहीं, सपा प्रत्याशी और मैलानी नगर पंचायत चेयरमैन अनीता यादव ने भी घर वालों को ढांढ़स बंधाते हुए हर प्रकार की मदद का आश्वासन दिया।
.....तो इस सदमे में चली गई एक और जान
बताते हैं कि कस्बा निवासी करीब 50 वर्षीय लायक मोहम्मद हादसे के वक्त वहां पहुंचे थे और पूरे मंजर को देख सदमे में आ गए। वह घर आए और उनकी सदमे से मौत हो गई। उनको भी रविवार को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।