लखीमपुर खीरी। हेपेटाइटिस शुरुआती दौर में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है। समय पर जांच और उपचार न होने पर संक्रमण लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
जिला अस्पताल में हर महीने करीब 250-300 मरीज हेपेटाइटिस से संबंधित इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि पैथोलॉजी की जांच में 25-30 लोगों में संक्रमण के संकेत मिल रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी, संक्रमण के कारणों और जांच की सुविधा को लेकर जागरूकता की कमी है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि हेपेटाइटिस बी संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सुई से फैल सकता है, जबकि हेपेटाइटिस सी मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते।
चिकित्सकों के अनुसार, लगातार थकान, भूख कम लगना, आंखों या त्वचा का पीला पड़ना, पेट दर्द और कमजोरी जैसे लक्षणों पर जांच करानी चाहिए। जांच और उपचार उपलब्ध हैं। समय पर संक्रमण की पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।