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प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजन का हंगामा

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निघासन। निघासन सीएचसी में प्रसव के चार घंटे बाद नवविवाहिता की मौत हो गई। घरवालों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। यह देख सभी डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल से खिसक गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घर वालों को किसी तरह से समझा-बुझाकर शांत कराया। घर वालों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया और शव लेकर घर चले गए।
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सिंगाही कस्बे के वार्ड नंबर सात निवासी परवेज बुधवार सुबह पांच बजे अपनी पत्नी जेबा (23) को प्रसव के लिए निघासन सीएचसी लाया था। परवेज और जेबा का यह पहला बच्चा था। उनकी शादी पिछले साल 13 अप्रैल को हुई थी। परवेज ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे जेबा ने नार्मल डिलीवरी से एक बच्ची को जन्म दिया। उसका आरोप है कि प्रसव के बाद उसकी पत्नी की देखरेख में अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों ने कोताही की। वह दर्द बताती रही, लेकिन डॉक्टरों ने उसको कायदे से देखकर दवा नहीं दी। शाम करीब पौने चार बजे जेबा की तबीयत अचानक काफी बिगड़ गई। घरवाले डॉक्टरों के पास दौड़ लगाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। पंद्रह मिनट बाद करीब चार बजे महिला वार्ड में दर्द से तड़प रही जेबा मौत के मुंह में समा गई। हालांकि उसकी नवजात बच्ची ठीक है। इसके बाद परिवारवालों ने रोना-पीटना और हो-हल्ला करना शुरू कर दिया। इसकी खबर पाकर कस्बा प्रभारी एसआई प्रेमचंद्र गौतम सिपाहियों के साथ अस्पताल पहुंचे। तब तक अस्पताल से सारे डॉक्टर व स्टाफ घरवालों का हो-हल्ला देखकर खिसक चुके थे। पुलिसवालों ने घरवालों से पूछताछ के बाद मृतका का पोस्टमार्टम कराने की बाबत जानकारी कर तहरीर मांगी। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद परिवार के लोगों ने कोई कार्रवाई और पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया औैर लाश लेकर घर चले गए। सीएचसी अधीक्षक डॉ. लालजी पासी ने बताया कि डिलीवरी के बाद ही मृतका के परिवारवालों को जच्चा में खून की कमी के बारे में बताकर उसे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन वे उसको नहीं ले गए। अस्पताल स्टाफ ने हर मुमकिन कोशिश कर नार्मल डिलीवरी कराई थी। उन्होंने इलाज या देखभाल में लापरवाही का आरोप सरासर गलत बताया।
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