लखीमुपर खीरी। गुणवत्ता संबंधी जांच रिपोर्ट आने के इंतजार में जिन दवाओं के बांटने पर रोक लगी थी। उनके वितरण की कॉरपोरेशन ने हरी झंडी दे दी है। इससे जिला एवं महिला अस्पताल के अलावा सीएचसी, पीएचसी पर दवाओं की कमी की दिक्क्त खत्म हो गई है। अस्पताल प्रशासन के साथ मरीजों को इससे राहत मिली है। बता दें कि कॉरपोरेशन ने दवाओं की जांच रिपोर्ट आने तक वितरण पर रोक लगा रखी थी। इस कारण अस्पताल में दवाओं का स्टॉक होने के बाद भी मरीजों में इनका वितरण नहीं हो रहा था, जिससे मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती थी।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन की ओर से जिला एवं महिला अस्पताल के अलावा सीएचसी पीएचसी को दवाओं की आपूर्ति की जाती है। इसमें जिला एवं महिला अस्पतालों को तो दवाएं सीधे भेजी जाती हैं। मगर, सीएचसी पीएचसी के लिए सीएमओ को दी जाती है। इसके बाद सीएचसी, पीएचसी को दवा भेजने की जिम्मेदारी सीएमओ की होती है। हलांकि कॉरपोरेशन ने जिले में दवाएं तो भेज दी। मगर, इनकी गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट आने तक वितरण पर रोक लगा दी थी। इससे जिला एवं महिला अस्पतालों के अलावा सीएचसी पीएचसी पर दवाएं होने के बावजूद मरीजों में वितरण नहीं किया जा रहा था। जो दवाएं पहले से मौजूद थीं वह भी खत्म होने लगीं थी। ऐसे में अस्पतालों में जहां दवाओं का संकट खड़ा हो गया वहीं मरीजों की परेशानियां भी बढ़ गईं। मरीजों की बढ़ती दिक्कत को लेकर कॉरपोरेशन ने दवा वितरण पर लगी रोक हटा दी है। इससे अब दवाओं का वितरण शुरू कर दिया गया है।
औषधि भंडार में मौजूद इन दवाएं के वितरण पर थी रोक
अमोक्सीक्लैव टेबलेट (एंटीबायोटिक), सिप्रोफ्लॉक्सिन ( आईड्रॉप), ओमेज (गैस, एसीडिटी), ट्राइमाडॉल टेबलेट (दर्द निवारक), विटामिन डी, एसकार्बिक एसिड, विटामिन सी, अमॉक्सी कैपसूल (एंटीबॉयोटिक), आरएल, एनएस एवं डीएनएस फ्लूड
जिला अस्पताल में इनके वितरण पर थी रोक
फ्लूड, सिप्रोफ्लोक्सेसाइन टेबलेट, फेनीट्वाइ सोडियम टेबलेट, क्लोरोक्वीन फास्फेट टेबलेट, पैरासीटामॉल इंजेक्शन, प्रोमेथाजीन इंजेक्शन, पेंटाजोसीन
जांच रिपोर्ट के इंतजार पर जिन दवाओं के वितरण पर रोक लगी थी। कॉरपोरेशन से उनके वितरण की अनुमति मिल गई है।
-डॉ. एसके मिश्रा, प्रभारी सीएमएस