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नवजात की मौत के बाद रुपये न देने पर प्रसूता को बंधक बनाया

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निघासन। हेल्थकेयर सेंटर में प्रसव के बाद बच्चे की मौत हो गई। केयर सेंटर मालिक ने प्रसूता के पति से इलाज का पूरा पैसा मांगा। जब पिता रुपये नहीं दे पाए तो केयर सेंटर संचालक ने उसे बंधक बना लिया। पीड़ित ने कोतवाली में शिकायत की तो पुलिस ने कहा कि जांच के बाद कार्रवाई करेंगे। डीएम ने मामले की जांच सीएमओ और एसडीएम को सौंपी है।
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तिकुनियां कोतवाली के गांव कड़िया निवासी रामू ने बताया कि शादी के तीन साल बाद उसकी पत्नी गीता देवी गर्भवती हुई। प्रसव पीड़ा होने पर बुधवार को वह उसे लेकर तिकुनियां पीएचसी पहुंचा। वहां चार घंटे तक प्रसव नहीं हुआ। डॉक्टरों ने उसे सीएचसी निघासन रेफर कर दिया। सीएचसी के बाहर कुछ दलाल मिल गए। उन्होंने प्राइवेट अस्पताल ले जाने की सलाह दी। निजी गाड़ी से वह मरीज को प्राइवेट हेल्थ केयर सेंटर ले गया। पीड़ित का आरोप है कि वहां पर ऑपरेशन के बाद बच्चा सुरक्षित पैदा होने की बात कही गई। उससे 14 हजार रुपये मांगे गए। उसने आठ हजार रुपये जमा कर दिए। अस्पताल में पत्नी को मृत बच्चा पैदा हुआ। हेल्थ केयर संचालक ने पूरा पैसा देने के बाद ही प्रसूता और उसके बच्चे को ले जाने की बात कही। रामू और उसकी पत्नी गीता का आरोप है कि हेल्थ केयर संचालक ने दोनों को अस्पताल से जाने नहीं दिया। बुधवार शाम तक दोनों अस्पताल में रहे। जब पति ने घर जाने की जिद की तो अस्पताल संचालक ने उनको जबरन रोक लिया और पति को गालियां दी। रामू के पिता चुन्नाराम ने बताया कि उसका बेटा किसी से ब्याज पर 6300 रुपये लेकर ही आया था। जब अस्पताल संचालक ने रुपये ले लिए, तभी जाने दिया। उधर अस्पताल संचालक ने मरीज को बंधक बनाने के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि वह बाकी रुपये न देने की वजह से ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
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पहले भी हो चुकी है कई मौतें
इस हेल्थ केयर सेंटर पर गांव दौलतापुर, बोझिया, जंगल नंबर 11 समेत करीब आठ मौतें बीते एक साल में हो चुकी हैं। कई बार मामले की शिकायत की गई, लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित रामू ने भी पुलिस को तहरीर दी। मगर, पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
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नोटिस तक सीमित रही कार्रवाई
करीब तीन माह पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हेल्थ केयर सेंटर पर छापा मारा था। उसमें 30 आशा बहुओं के प्रसव कराने का रजिस्टर मिला था। रजिस्टर में आशा बहुओं के अलावा अस्पताल में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं। सीएमओ ने आशा बहुओं और अस्पताल संचालक को नोटिस भी दी लेकिन कार्रवाई कोई नहीं हुई।
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सीएचसी के बाहर दलालों का जमावड़ा
प्राइवेट अस्पतालों के दलालों का सीएचसी के बाहर जमावड़ा लगा रहता है। सीएचसी में आशा बहुओं से लेकर कुछ नर्स भी चंद रुपयों के लालच में प्राइवेट अस्पताल संचालक से सांठगांठ कर सीएचसी में आने वाली प्रसूताओं को इसी हेल्थ केयर सेंटर पर भेजती हैं। प्राइवेट टैक्सी चालक भी इनसे मिले हुए हैं। कई बार प्राइवेट अस्पताल में ले जाने के लिए टैक्सी चालक एक दूसरे से झगड़ते देखे गए क्योंकि मरीजों से इनको मोटा किराया मिलता है।
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अभी मामले की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कराकर दोषी अस्पताल संचालक पर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
मामले की जांच सीएमओ और एसडीएम को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के बाद अस्पताल संचालक पर कार्रवाई की जाएगी।- शैलेंद्र सिंह, डीएम
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