लखीमपुर खीरी। प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण जन अरोग्य योजना का हाल जिले में बेहाल है। अधिकारियों की उदासीनता के कारण अधिकांश लाभार्थी गोल्डन कार्ड बनवाने से लेकर अपनी पात्रता जानने को लेकर जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि प्रधानमंत्री के पत्र पात्रों में बंटे कि नहीं इस बारे में उन्हें कोई जानकारी तक नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी की ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिनके नाम 2011 की आर्थिक जनगणना में थे। पात्रता सूची में अपना नाम जानने के लिए गरीबों को इधर उधर भटकना न पड़े, इसके लिए प्रधानमंत्री ने लाभार्थियों के लिए पत्र भेजे थे। ये पत्र जिले में साल की शुरूआत में ही सीएमओ कार्यालय आ गए थे। इनकी संख्या दो लाख अस्सी हजार के करीब बताई जाती है। मोदी पत्र का उद्देश्य लाभार्थियों को पात्र होने और योजना के बारे में जानकारी देना था, जिससे लाभार्थी आसानी से अपना गोल्डन कार्ड बनवाकर मुसीबत में इसका लाभ उठा सके। प्रधानमंत्री के पत्र को लेकर अधिकारियों ने शुरूआत में तो काफी तत्परता दिखाई और इन्हें सीएचसी पर भेजकर आशाओं को बांटने की जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन बाद में इनकी मॉनिटरिंग करना तक भूल गए। इससे अधिकांश लाभार्थियों को प्रधानमंत्री का पत्र ही नहीं मिल सका। इससे तमाम लोग पात्रता सूची में अपना नाम जानने के लिए जिला अस्पताल से लेकर सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
पात्रता में चयनित परिवार-3,66,171
प्रधानमंत्री पत्र आए- 2,66,000
जिम्मेदारों को पता ही नहीं कितनों को मिला पत्र
आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी से लेकर उनकी टीम को यह पता ही नहीं कि कितने लाभार्थियों तक प्रधानमंत्री का पत्र पहुंचा। अधिकारियों का कहना है कि पत्र बांटने की जिम्मेदारी आशा वर्कर को दी गई थी। बांटने के बाद अभी तक उन्होंने कोई सूची या अन्य कोई जानकारी नहीं दी है। इसलिए यह बता पाना मुश्किल है कि कितनों को पत्र मिला और कितनों को नहीं।
प्रधानमंत्री के जितने भी पत्र आए थे, उन्हें बांटने के लिए सीएचसी पर भेजा गया है। बांटने की जिम्मेदारी आशा वर्कर की थी। हालांकि अभी तक आशा वर्करों ने इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी है। सीएचसी अधीक्षकों से जल्द ही इसकी सूचना मांगी जाएगी। -डॉ. बीसी पंत, एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी आयुष्मान योजना