होली पर शुक्रवार को पूरा जिला रंग और उमंग में सराबोर हो उठा। ऊंच-नीच, ईर्ष्या-द्वेष की कालिमा इंद्रधनुषी रंगों में धुल गई। शहर में इतना रंग और गुलाल उड़ा कि सड़कें लाल हो र्गइं। दोपहर तक सड़कों पर होलियारों की टोलियाें ने खूब धूम मचाई। ये हाथों में रंग-गुलाल लिए होली गीतों पर नाचते हुए एक-दूसरे को रंगों से सराबोर कर रहे थे। दोपहर बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर और पकवान बनाकर एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं।
मुहूर्त के अनुसार गुरुवार रात में होलिका दहन होने के बाद शुक्रवार सुबह होते ही लोग होली के उमंग में डूब गए। युवा टोलियां बनाकर सड़कों पर निकल आए। टोली में शामिल अधिकतर लोग अपने चेहरों पर मुखौटे लगाए थे। किसी के सिर पर राजस्थानी और गुजराती पगड़ी थी तो कोई रेशमी धागों की विग पहने था। कपड़े और प्लास्टिक के कैप लोगों के सिर का बचाव कर रहे थे।
होली को लेकर बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। वे सुबह से तरह-तरह की पिचकारियां लेकर लोगों पर हरा, लाल, नीला, पीला रंग डाल रहे थे। बड़े और छोटे, महिलाओं और पुरुषों सबमें बराबर का उत्साह था। होली के रंग के दौरान बड़े-छोटे और ऊंच-नीच का कोई अंतर न रहा। लोगों ने आपसी ईर्ष्या-द्वेष भुलाकर एक दूसरे को रंगों से सराबोर किया। दोपहर बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर और पकवान खिलाकर होली की शुभकामनाएं दीं। होली मिलन का सिलसिला देर रात के बाद शनिवार को भी दिन भर जारी रहा।
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पानी के रंगाें की जगह गुलाल को दी वरीयता
इस बार होली में रंग खेलते समय लोगों ने पानी के रंगों की जगह गुलाल को अधिक तरजीह दी। बच्चे जरूर गीला रंग खेलते दिखाई दिए लेकिन अधिकतर लोगों ने गुलाल से हीं रंग खेला। लोगों ने साधारण गुलाल की अपेक्षा ब्रांडेड गुलाल को तरजीह दी।
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फर्राटा भरती बाइक से बनीं खौफ का पर्याय
प्रतिबंध के बावजूद सड़कों पर फर्राटा भरती बाइक से लोगों को बच कर निकलना पड़ा। शराब के नशे में युवाओं को तेज गति से मोटरसाइकिलें चलाते देखा गया।
इनकी तेज रफ्तार की वजह से कई जगहों पर दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा तो कई लोग जख्मी हुए।