झोलाछाप पर लगा लापरवाही से इलाज करने का आरोप
भीषण गर्मी से इलाके में संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते बेला के एक ग्रामीण की मौत हो गई। मृतक के भतीजे ने झोलाछाप पर लापरवाही से इलाज करने का आरोप लगाया है। संक्रामक रोगों के पैर पसारने के बाद भी स्वास्थ्य महकमे की नींद नहीं खुल रही है।
बेलाखुर्द कॉलोनी निवासी 45 वर्षीय रामआसरे नौगवां बस स्टैंड पर बूट पालिश और फटे पुराने जूते सिलकर अपने परिवार का पेट पालता था। रोजाना की तरह शुक्रवार की शाम चार बजे वह नौगवां में दुकान लगाने गया था। गर्मी से अचानक उसकी तबियत खराब हो गई और वह वहीं गिर पड़ा। लोगों ने उसे वहीं एक झोलाछाप की क्लीनिक पर भर्ती कराया और इसकी सूचना उसके परिवार वालों को दी गई। झोलाछाप ने दवा देकर घर उसे घर भेज दिया। शनिवार की सुबह उसके पेट में फिर तेज दर्द उठने से घरवाले उसे फिर उसी झोलाछाप के यहां लाए। मृतक के भतीजे गजराज के मुताबिक उसने करीब आधा दर्जन बोतलें चढ़ाईं मगर उसके चाचा की तबियत ठीक होने के बजाए गंभीर होती चली गई। उसे ठीक होता न देख घरवाले रुपयों का इंतजाम कर शाम करीब पांच बजे पलिया सीएचसी लेकर जा रहे थे कि सरखना के पास उसकी मौत हो गई। फिर भी तसल्ली के लिए अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के भतीजे ने झोलाछाप पर लापरवाही से इलाज करने का आरोप लगाया है। उसकी मौत से पत्नी रजनी, पु़त्र अमन, पवन, पुत्री शिवानी का रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने कुकरमुत्तों की तरह इलाके में फैले झोलछापों पर अभियान चलाकर कार्रवाई करने और इलाके में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को चाक चौबंद किए जाने की मांग की है। ग्राम प्रधान अरविंद कुमार, सपा नेता रविअहमद ने मृतक के घर जाकर परिजनों को ढाढ़स बंधाया और पारिवारिक लाभ के साथ अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया। मृतक काफी गरीब था और उसकी मौत हो जाने से परिवार पर पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है।