अफसरों को भी पैदल जाना पड़ा दफ्तर
राजकीय वाहन चालक संघ की सोमवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते अधिकतर अफसरों को पैदल या निजी वाहनों से अपने दफ्तर जाना पड़ा। कुछ अधिकारी खुद सरकारी वाहन चलाकर दफ्तर जाते दिखे तो चालकों ने उन्हें सरकारी गाड़ी से उतारकर पैदल जाने को मजबूर कर दिया। वाहन चालकों की हड़ताल से दफ्तरों में अफरा तफरी रही।
छठे वेतनमान की विसंगतियों के निराकरण की मांग को लेकर राजकीय वाहन चालक संघ ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राजकीय वाहन चालकों की मांग है कि ग्रेड वेतनमान 1900 से 2000 रुपया किया जाए। एक माह में मिलने वाले मूल वेतन के साथ डीए जोड़ कर दिया जाए। जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद वर्मा ने बताया कि प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार के साथ संघ पदाधिकारियों की हुई बैठक में प्रमुख सचिव ने राजकीय वाहन चालकों की मांगें मानने का आश्वासन दिया था। कई माह बीत जाने के बाद भी अब तक उनकी मांगों का कोई हल नहीं निकल सका है। इससे मजबूर होकर वाहन चालक बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं।
हड़ताल के पहले दिन सोमवार को राजकीय वाहन चालकों ने पूरी तरह हड़ताल रखी। राजकीय वाहन चालकों की हड़ताल के चलते तमाम सरकारी अफसरों को पैदल ही दफ्तर जाना पड़ा। कई अधिकारी खुद सरकारी गाड़ी ड्राइव कर दफ्तर गए। कुछ अधिकारियों को चालकों ने सरकारी गाड़ी से उतारकर पैदल जाने पर मजबूर कर दिया।