लखीमपुर खीरी। भीषण गर्मी में बिजली कटौती से जहां लोग परेशान हैं, वहीं सरकारी नलकूप भी ठीक से नहीं चल पा रहे। कहीं फॉल्ट होने से घंटों कटौती कर दी जाती है तो कहीं लो-वोल्टेज होने से नलकूप नहीं चल पाते। फसलें न सूखें, ऐसे में अधिकांश किसान ट्यूबवेल से सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे फसलों की लागत बढ़ रही है।
जनपद में 826 सरकारी नलकूप हैं। इसमें कुछ नलकूप तो यांत्रिक दोष की वजह से बंद पड़े हैं तो कुछ पर्याप्त बिजली न मिलने से संचालित नहीं हो पा रहे। इसमें सबसे ज्यादा मोहम्मदी, मितौली, अलीगंज, बरबर आदि क्षेत्रों में बिजली का संकट बना है। अधिकारियों का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 16 से 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि लो-वोल्टेज के चलते पूरे-पूरे दिन नलकूप संचालित नहीं हो पाते।
किसान तो परेशान होते ही हैं, साथ ही बिजली निगम के कर्मचारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लखीमपुर सर्किल के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गर्मी में बिजली की मांग काफी बढ़ी है, जिसके चलते कुछ क्षेत्रों में परेशानी आ रही है।
दिन में वोल्टेज नहीं, रात में सिंचाई कर रहे किसान
- किसान बोले- रात में बढ़ जाता है जानवरों के हमले का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
मैगलगंज। क्षेत्र में दिन में ठीक से वोल्टेज न आने से नलकूप नहीं चल पाते। रात में वोल्टेज थोड़ा ठीक रहता है, ऐसे में अधिकांश किसान रात में फसलों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। कुछ किसान तो डीजल चालित ट्यूबवेल से फसल बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन लागत काफी बढ़ गई है।
बुधवार रात क्षेत्र के निवासी किसान रोहित कुमार ऐसे ही अपने खेत की सिंचाई करते मिले। उन्होंने बताया कि दिन में वोल्टेज कम आने की वजह से नलकूप नहीं चल पाता। मजबूरी में रात में सिंचाई करनी पड़ती है। ऐसे में जानवरों के हमले का भी खतरा रहता है।
जेई राजू सागर ने बताया कि अधिक गर्मी और घरेलू खपत बढ़ने से कृषि फीडरों पर दबाव बढ़ा है। इस कारण प्राथमिकता के आधार पर रात में बिजली आपूर्ति की जा रही है। विभाग प्रयास कर रहा है कि जल्द ही स्थिति में सुधार हो।
-किसान बोले- रात दो बजे के बाद ही आता है नलकूप चलाने लायक वोल्टेज
दिन में बिजली ठीक से नहीं आती। रात दो बजे के बाद नलकूप चलाने लायक वोल्टेज आता है। रात को जागकर फसलों की सिंचाई करनी पड़ती है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो फसल सूख जाएगी। पिछले हफ्ते से तो हर रात खेत में ही सोना पड़ रहा है। -दीपक तिवारी, मैगलगंज
नलकूप ठीक से संचालित न होने से डीजल से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन डीजल 90 रुपये लीटर से ऊपर चला गया है। जितना आमदनी नहीं है, उससे ज्यादा खर्च सिंचाई में हो रहा है। सरकार को बिजली व्यवस्था सुधारनी चाहिए या डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए। -मोहित शुक्ला, मैगलगंज
सरकारी ही नहीं निजी नलकूपों पर भी बिजली का संकट
पलियाकलां। पतवारा फीडर में 21 मई को आई तेज आंधी के बाद से ट्रांसफाॅर्मर न रखे जाने से निजी नलकूप बंद हैं। पानी न मिलने से फसलें सूख रहीं हैं। पतवारा फीडर में कई गांव आते हैं, जहां किसानों ने निजी नलकूप लगवा रखे हैं, लेकिन विद्युत आपूर्ति ठीक न होने से निजी व सरकारी नलकूप संचालित नहीं हो पा रहे।
त्रिकोलिया फीडर का भी यही हाल है। अगर सरकारी नलकूपों की बात करें तो पलिया ब्लाॅक क्षेत्र के संपूर्णानगर और चंदनचौकी क्षेत्र में 29 नलकूप हैं। इसमें 18 नलकूप थारू और 11 नलकूप संपूर्णानगर क्षेत्र में लगे हैं। जिन गांवों की विद्युत व्यवस्था ठीक है, वहां नलकूप चल रहे हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर ट्रांसफाॅर्मर खराब होने और लाइन टूटने से नलकूप बंद हैं। किसान ट्यूबवेल से सिंचाई को विवश हैं। संवाद
ट्रांसफॉर्मर खराब होने से सिंचाई प्रभावित
पसगवां। ट्रांसफाॅर्मर खराब होने से तीन राजकीय नलकूप बंद हैं। किसानों ने बताया कि एम डब्ल्यू 126 भोगीपुर पाठक, एम डब्ल्यू 148 गनेशापुर, और एम ई 2 पिपरी अजीज के नलकूप ट्रांसफाॅर्मर खराब होने से संचालित नहीं हो पा रहे। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे किसानों में रोष है। संवाद
ट्रांसफार्मर के अभाव में बंद पड़ा नलकूप
बरबर। ग्राम पंचायत ककराही के साहूपुर गांव में 150 एमडब्ल्यू नलकूप पर ट्रांसफॉर्मर न होने से बंद पड़ा है। नलकूप बंद होने से किसान फसलों की सिंचाई निजी नलकूपों से करने को मजबूर हैं। नलकूप चालक जितेंद्र ने बताया उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। संवाद
रात में फसलों की सिंचाई करता किसान। संवाद
रात में फसलों की सिंचाई करता किसान। संवाद
रात में फसलों की सिंचाई करता किसान। संवाद
रात में फसलों की सिंचाई करता किसान। संवाद