भूसे में दाना तो दूर पानी भी नहीं मिला रहे
निघासन ब्लॉक में 65 ग्राम पंचायतों में मात्र सात गोशालाएं बनी हैं। इन गोशाला में गायों की स्थिति बहुत दयनीय है। मूर्तिहा, लालबोझी, चखरा, ढखेरवा खालसा में गायें हरे चारे को तरस रही हैं। मवेशी भूख से तड़प रहे हैं। ठंड से बचाव के लिए जानवरों के नीचे सूखी पत्तियां आदि भी नहीं पड़ी है।
भूसा रखा है, लेकिन रात से पहले नहीं दिया जाता है। सूखे भूसे में दाना मिलाना तो दूर पानी भी नहीं मिलाया जाता है। हरा चारा और दाना प्रधान और सचिव नही दे रहे हैं। इससे गायों को सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। मोहम्मदी के ग्राम पंचायत गुरैला के गांव अलीनगर में अस्थाई गोशाला में एक टीन शेड के नीचे 44 पशुओं को रखा गया है।
जिले में हैं कुल 61 गोआश्रय स्थल
जिले में निराश्रित पशुओं को आश्रय देने के लिए कुल 61 गोआश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनमें 49 अस्थाई गोआश्रय स्थल, पांच वृहद गोआश्रय स्थल, जिला पंचायत से संचालित दो गोआश्रय स्थल हैं। इनके अलावा पांच गोआश्रय स्थल नगरीय निकायों से संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 19564 गोवंशीय पशुओं को रखा गया है।
गोशालाओं में पलने वाले पशुओं के पोषण के लिए सिर्फ 30 रुपया प्रति पशु के हिसाब से सरकार धनराशि देती है। यह धनराशि सिर्फ पशुओं के पोषण के लिए होती है, लेकिन कई गोशालाओं में गोवंशों में हरा चारा तो दूर भूसा भी नहीं नसीब हो रहा है।
'कहीं चारे की कमी नहीं है'
जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सोमदेव सिंह चौहान ने कहा कि पशुओं के चारे के लिए सरकार से 30 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाता है। गोआश्रय स्थलों की देखरेख और चारे की व्यवस्था ग्राम पंचायतें करती हैं। चारे की कमी को पूरा करने के लिए भूसा बैंक भी बनाए गए हैं। चारे की कहीं कमी नहीं है। समय-समय पर गोशालाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की पड़ताल की जाती है। जहां खामी दिखती है, उसे दूर किया जाता है।