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गोशालाओं में ठिठुर रहे गोवंश, दो की मौत

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पलिया के फरसहिया टांडा में स्थित गोशाला में टिनशेड के नीचे मवेशी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। दिसंबर शुरू होने के साथ ही मौसम में ठिठुरन बढ़ गई है लेकिन गोशालाओं और पशु आश्रय स्थलों पर अभी तक जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसकी वजह से बुधवार को खम्बारखेड़ा स्थित नगर पालिका सदर की गोशाला में दो गोवंश की मौत हो गई। इसके बाद हमारी टीम ने गोशालाओं की स्थिति का जायजा लिया तो कुछ ही जगह व्यवस्था दुरुस्त नजर आई।
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महेवागंज के गो आश्रय गृह में बंद पशु ठंड में ठिठुर रहे हैं और स्थाई बसेरों की कमी से उनकी जान आफत में है। यहां ठंड से बचाव के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। बुधवार को खम्बारखेड़ा स्थित नगर पालिका सदर की गोशाला में दो पशुओं की मौत हो गई जबकि तीन पशु गंभीर बीमार दिखे। मगर यहां पशुओं को ओढ़ाने के लिए बोरों की झूल का अब तक इंतजाम तक नही हो सका है। अधिकतर पशु खुले आसमान में रात गुजार रहे हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि ठंड में बुजुर्ग पशुओं का बीमार दिखना आम बात है। वहीं, चिकित्सकों और गो आश्रय की देखरेख में लगे कर्मचारियों का दावा है कि ठंड से बचाव के लिए तिरपाल, पुआल और अलाव का इंतजाम किया गया है। तीन पशुओं के बीमार होने पर कर्मचारियों ने बताया कि कभी कभार डॉक्टर आते हैं। इस आश्रय गृह में फूलबेहड़ के पशु चिकित्सक डॉ. मनवर शेख पर पशुओं के इलाज का जिम्मा है। मकसोहा के गो आश्रय गृह में करीब आठ सौ पशु हैं। यहां तीन स्थाई टीन शेड और सात छप्पर पड़े है। नीचे डालने के लिए पुआल का इंतजाम किया गया है।
वहीं, नगर पालिका के गो आश्रय गृह में 218 पशु हैं। इसमें पशुओं के इलाज की जिम्मेदारी पतरासी के पशु चिकित्सक डॉ. यशवंत सिंह के कंधे पर है। डॉ. यशवंत ने बताया कि बुधवार को काफी बूढ़े और कमजोर पशु की मौत हो गई। नकहा के भानपुर स्थित गो आश्रय में पांच सौ के करीब जानवर आश्रय लिए हुए हैं। सिर्फ तीन टिन सेड और दो जगह छप्पर होने से यहां भी जानवर खुले आसमान के नीचे ठंड में ठिठुर रहे हैं।
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बेहतर इंतजाम का दावा
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जिले भर की गोशालाओं और पशु आश्रय स्थलों में बेहतर इंतजामों का दावा कर रहे हैं लेकिन हालात इससे जुदा नजर आ रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. टीके तिवारी के मुताबिक प्रशासन गोवंश और अन्य पशुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्साधिकारियों और बीडीओ को गोशालाओं व पशु आश्रय स्थलों की व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी निगरानी वह स्वयं कर रहे हैं। इसमें फर्श पर पराली या गन्ने की पताई बिछाने, टिन शेड और पशुओं को ओढ़ाने के लिए जूट के बोरों की झूल बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं से भी सहयोग मांगा गया है।
खम्बारखेड़ा के गो आश्रय में सवा दो सौ पशु हैं। जाड़े से बचाव के सभी इंतजाम किए गए हैं। पशुओं के शरीर ढंकने के लिए बोरियों का इंतजाम किया जा रहा है।
- आर अंबेश, ईओ, नगरपालिका लखीमपुर
खम्बारखेड़ा गो आश्रय में दुर्बल और बूढ़े पशु की मौत हुई है। एक दो बीमार हैं, उनका इलाज चल रहा है। शेष पशुओं की हालत ठीक है। पशुओं को ठंड से बचाने के सभी इंतजाम किए गए हैं।
- डॉ. यशवंत, पशु चिकित्साधिकारी, पतरासी
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पलिया की गोशालाओं में सर्दी से बचाव के हुए इंतजाम
पलियाकलां। यहां की दोनों गोशालाओं में मवेशियों को ठंड से बचाने के इंतजाम दुरस्त कर लिए गए हैं। इसमें नगर पालिका की ओर से एक गोशाला लालपुर ढाका गांव में बनाई गई है। यहां गोवंश को ठंड से बचाव के लिए पुआल और पताई डालने के साथ ही आश्रय स्थल के चारों ओर तिरपाल लगाई गई है। अलाव का इंतजाम भी किया गया है। इसी तरह ब्लाक की ओर से फरसहिया टांडा में बनी गोशाला में भी इंतजाम किया गया है। दोनों गोशालाओं में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए बोरों का भी इंतजाम किया गया है। बीडीओ डॉ. विनय कुमार मिश्र का कहना है कि सर्दी केे मौसम में सबसे ज्यादा दिक्कतें बेजुबान जानवरों को ही उठानी पड़ती हैं। इसलिए ब्लाक प्रशासन इसका खासा ध्यान रख रहा है।
सर्दी से बचाव के लिए मवेशियों के रहने वाले स्थानों पर व्यवस्थाएं चाक चौबंद हैं। सर्दी से ठीक ढंग से बचाव हो और पशु को कोई रोग न हो, इसके लिए पशु चिकित्सक को भी निगरानी के लिए भेजा जाता है और मैं खुद जाकर निगरानी करता हूं।
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- महेन्द्र कुमार चौधरी, ईओ, नगर पालिका पलिया
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