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अच्छे उत्पादन के लिए मिट्टी का स्वस्थ होना जरूरी

Mon, 07 Dec 2015 06:56 PM IST
लखीमपुर खीरी
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कृषि विज्ञान केंद्र ने कृषक समाज इंटर कॉलेज गोला के गोवर्धन हाल में मृदा स्वास्थ्य दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्रधानाचार्य एसएन दीक्षित ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एसके विश्वकर्मा ने की। इस मौके पर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। साथ ही किसानों को मिट्टी की सेहत के लिए मृदा स्वास्थ्य परीक्षण की सलाह दी गई।  
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मुख्य अतिथि एसएन दीक्षित ने कहा कि जिस तरह मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक भोजन की जरूरत होती है उसी तरह पौष्टिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मृदा का स्वस्थ रहना जरूरी है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसके विश्वकर्मा ने बताया कि अधिक उत्पादन वाली फसल प्रजातियों के प्रयोग से ही कृषि उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। यह फसलें मृदा से अधिक से अधिक पोषक तत्वों का उपयोग कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप मृदा उर्वरकों की कमी दिखाई पड़ने लगी है। फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के बाद फसलवार संस्तुति के आधार पर फसलों में खाद का प्रयोग करना चाहिए। मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए मृदा में भौतिक, रासायनिक और जैविक क्रियाओं का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. पीके विसेन ने मृदा परीक्षण की जरूरत, नमूना एकत्र करने की तकनीक आदि की जानकारी दी। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद सोहेल ने शाक सब्जी और फलों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण और उनके सुधार के लिए संतुलित मात्रा की जानकारी किसानों को दी। पोषक तत्वों और मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रभाव और कुपोषण को रोकने के लिए मशरूम की उपयोगिता और उत्पादन पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिक (पशुपालन) ने मृदा स्वास्थ्य सुधार में पशुपालन का महत्व, पशु पोषण, खनिज मिश्रण और कृत्रिम गर्भाधान के बारे में विस्तार से बताया। तकनीकी सत्र के बाद बेहटा, बख्खारी, ढोंगवा और बरगदिया के 50 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से वितरित किए गए।
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