फारेस्ट कालोनी में श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन
शहर के फारेस्ट कालोनी स्थित श्री रामेश्वरमनाथ मंदिर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन से आए कथाव्यास आचार्य योगेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विदुर प्रसंग में कहा कि भगवान मात्र मनुष्य का भाव देखते हैं। पांडवों के शांति दूत बनकर आए योगेश्वर श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के 56 प्रकार के षड़रस व्यंजनों को ठुकराकर विदुर के घर केले के छिलकों का शाक ग्रहण किया। दुर्योधन के 56 भोगों में अहंकार था, जबकि विदुर के भोजन में श्रद्धा भाव था।
फारेस्ट कालोनी स्थित श्री रामेश्वरम नाथ मंदिर 14 नवंबर से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। यह कथा 20 नवंबर तक प्रतिदिन शाम तीन बजे से सात बजे तक होगी। पहले दिन जलयात्रा और मंडप पूजन के बाद कथाव्यास ने कहा कि कलिकाल में श्रीमद् भागवत कथा संपूर्ण पापों का नाश करने वाली है। कलयुग में भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है। संगीतकारों की टोली में गायक के रूप में पं. रवि शंकर रुद्र, तबला वादक के रूप में राजेंद्र उपाध्याय और पैड पर उदय ने संगत की। समिति के आनंद अवस्थी ने बताया कि प्रतिदिन सुबह आठ बजे से 11 बजे तक रुद्राभिषेक का आयोजन हो रहा है।
कथा में प्रमुख रूप से यजमान के रूप में आशीष कुमार सिंह, शिवराम सिंह चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, डॉ. अजय पांडेय, पुजारी अनूप मिश्र, झम्मन लाल, वीपी सिंह, अविनाश सिंह, युवराज शेखर, मुकुल वर्मा, रितुराज बाजपेयी, नीरज सिंह, शैलेंद्र सिंह, राजेंद्र माथुर, दीपक भटनागर, नरेंद्र, यज्ञाचार्य डॉ. ओंकार दुबे, विनोद मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी, उमेश कुमार मिश्र, शशिधर मिश्र, मोहन बाजपेयी आदि मौजूद रहे।