न फायर सेफ्टी अलार्म, न अग्निशमन यंत्र, खुले में दिखते हैं तारों के झुंड
सूबे की राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में आग की लपटें और धुएं के गुबार से कई जानें चली गईं, लेकिन जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब भी सुरक्षा संयंत्रों के लेकर संजीदा नहीं दिख रहे हैं। लखनऊ के ट्रामा सेन्टर में इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी जिला अस्पताल में रविवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो न फायर सेफ्टी अलार्म लगा मिला और न ही अग्निशमन यंत्र मिले। यहां तक कि वार्ड के पास ही खुले में तारों का झुंड बिखरा दिखा। कई स्थानों पर बिजली के खुले तार दुर्घटना को दावत देते प्रतीत होते हैं।
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। दूसरी मंजिल पर स्थित न्यू सर्जिकल वार्ड में आपरेशन वाले मरीज भर्ती होते हैं, लेकिन यहां तक आने जाने के लिए सिर्फ एक रैंप है, जिससे सिर्फ एक ही मरीज निकल सकता है। किसी भी प्रकार की आपदा के वक्त भर्ती मरीजों को वहां से निकालने के लिए पर्याप्त स्ट्रेचर तक नहीं है और न ही इतने मरीज एक साथ वहां से निकल पाएंगे। वहीं मेडिकल पुरुष, महिला वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड में अग्निशमन यंत्र तक नहीं हैं।
खुले में फैला बिजली के तारों का मकड़जाल
जिला अस्पताल में ना तो सुरक्षा के ही पर्याप्त इंतजाम है और न ही बिजली के केबिल और तार ही व्यवस्थित से हैं। तारों में जगह जगह पर ज्वाइंट है। इनमें से कुछ पर टेपिंग है और कुछ ज्वांइट खुले में है, जिससे कभी भी स्पार्किंग आदि होने से लखनऊ जैसी घटना घटित हो सकती है।
मेडिकल वार्ड में अग्निशमन यंत्र तक नहीं
मेडिकल वार्ड दो मंजिला इमारत है, जिसके निचले हिस्से में पुरुष और ऊपरी हिस्से में महिला वार्ड है। दोनों वार्डों में निर्धारित बेड़ों की संख्या से कहीं ज्यादा मरीज भर्ती रहते हैं। ऊपरी मंजिल पर स्थित महिला वार्ड आने जाने के लिए सिर्फ एक ही जीना है, लेकिन यहां पर अग्निशमन यंत्र तक नहीं हैं। ऐसे में यदि किसी समय कोई वारदात हो जाए तो महिला मरीजों की जान आफत में पड़ सकती है।
वारदात के बाद भी नहीं चेते अधिकारी
जिला अस्पताल में इमरजेंसी दरवाजे के ऊपर भी तारों का मकड़जाल है। इसके पास भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। बता दें कि अभी कुछ दिनों पूर्व ही इन्हीं तारों में स्पार्किंग होने पर आग लग गई थी, जिस पर बड़ी मशक्कत के बाद काबू पा मिला था और एक बड़ी घटना होने से बची थी।
जिला अस्पताल में सुरक्षा उपायों को लेकर प्रस्ताव भेजा जाता है, जिस पर टीम सुरक्षा प्रबंधक करती है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्चाधिकारियों से वार्ता की जाएगी और इन्हें दुरुस्त कराया जाएगा।
डॉ जावेद अहमद, सीएमओ