मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को लखीमपुर खीरी की धरती पर थे लेकिन निशाने पर पश्चिम बंगाल का चुनाव रहा। मुख्यमंत्री ने सपा और कांग्रेस के साथ ही पश्चिम बंगाल में सत्तासीन दल तृणमूल कांग्रेस पर जमकर जुबानी हमला बोला। तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए नागरिकता संशोधन कानून में देरी के लिए विपक्षियों को जिम्मेदार ठहराया।
लखीमपुर के मियांपुर में बांग्लादेश से विस्थापित हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए भौमिक अधिकार और शासन की योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए आयोजित समारोह में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंगाल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जिक्र किया। राष्ट्रगान के रचयिता रविंद्रनाथ टैगोर के साथ ही राष्ट्रगीत के रचनाकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का भी कई बार उल्लेख किया। उन्होंने मियांपुर का नाम रविंद्रनगर किए जाने का एलान किया।
टीएमसी और कांग्रेस पर साधा निशाना
उन्होंने विभाजन की त्रासदी के बाद विस्थापित बांग्लादेशियों को अपनी पहचान बनाए रखने के लिए कहा। उनसे हिंदू सनातन धर्म के साथ ही बंगाल की धुन और रवींद्र संगीत से जुड़े रहने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगीत वंदेमातरम के 150वें वर्ष पूरे होने और भौमिक अधिकार प्रमाण पत्र मिलने को आपस में जोड़ा। उन्होंने बांग्लादेशियों को अपनाने को हिंदुत्व की सहिष्णुता के नमूने के तौर पर प्रस्तुत किया। नागरिकता संशोधन कानून के निर्माण में देरी के लिए सपा और कांग्रेस के साथ ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को भी जिम्मेदार ठहराया।
मुख्यमंत्री ने कानून के विरोध में हुए आंदोलनों के पीछे कांग्रेस-सपा और टीएमसी के लोगों का हाथ होने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने भाषण में कई बार टीएमसी का जिक्र किया। पश्चिम बंगाल में इसी महीने चुनाव होने वाले है। ऐसे में भाजपा टीएमसी पर हमले में कोई कोरकसर नहीं छोड़ना चाहती। इसी वजह से लखीमपुर की धरती से प. बंगाल तक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया।
चुनाव से पहले बांग्लादेशी परिवारों को साधा
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश के चार जिलों में ही 65 हजार से अधिक बांग्लादेशी हिंदू परिवार हैं। ऐसे में बांग्लादेशी परिवार 2027 के विधानसभा चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री ने कई बार अहसास कराने का प्रयास किया कि केवल भाजपा सरकार में विस्थापित बांग्लादेशियों को न्याय मिला है। कांग्रेस और सपा पर केवल अधूरे वादे करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्ला बोलने वाले भारतीय हैं और अब कोई उन्हें बांग्लादेशी नहीं कहेगा। उन्होंने कई बार विभाजन के सबक भी याद दिलाए।