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Lakhimpur Kheri News: बार-बार हाथ धोना और ताला जांचना नहीं है सामान्य

Sun, 24 May 2026 11:01 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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जिला अस्पताल में मरीजों को जानकारी देते मनोचिकित्सक डॉ. अ​खिलेश शुक्ला। संवाद
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लखीमपुर खीरी। डॉक्टर साहब...मेरी पत्नी थोड़ी-थोड़ी देर में काफी देर तक हाथ धोती रहती है। जरा सी गंदगी दिखने पर परेशान हो जाती है। कुछ इसी तरह की समस्याएं लेकर लोग जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी पहुंच रहे हैं।
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कोई रात में बार-बार घर का ताला चेक करता है तो कोई थोड़ी देर बाद गैस का रेगुलेटर देखने पहुंच जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सामान्य व्यवहार नहीं, बल्कि ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) जैसी मानसिक बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि चिकित्सकीय भाषा में इसे ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) कहा जाता है। जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में प्रतिदिन करीब 15 से 20 ओसीडी के मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीजों की काउंसलिंग और दवाओं के जरिये इलाज किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में लोग इस बीमारी को सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर इलाज और नियमित दवा से इसमें काफी सुधार संभव है।
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अभिभावकों से बच्चों में भी आ सकते हैं लक्षण
डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि ओसीडी से ग्रसित लोग अनजाने में अपनी आदतें बच्चों में भी डालने लगते हैं। यदि कोई व्यक्ति बार-बार हाथ धोता है या अत्यधिक सफाई करता है तो वह बच्चों को भी उसी तरह व्यवहार करने के लिए प्रेरित करने लगता है। इससे बच्चों में भी ऐसे लक्षण विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है।

गंभीर श्रेणी की बीमारी, बन सकता है प्रमाणपत्र
ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर को गंभीर मानसिक बीमारी की श्रेणी में रखा गया है। यदि यह बीमारी मरीज की दैनिक दिनचर्या को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हो तो सरकारी मान्यता प्राप्त मनोरोग विशेषज्ञ की जांच के बाद मेडिकल सर्टिफिकेट या दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी जारी किया जा सकता है।


यह हो सकते हैं ओसीडी के लक्षण
गंदगी से अत्यधिक परेशानी होना
बार-बार या लंबे समय तक हाथ धोना
बाथरूम में जरूरत से ज्यादा समय लगाना
बार-बार ताला, कुंडी या गैस रेगुलेटर चेक करना
छोटी-छोटी बातों का लगातार दिमाग में घूमते रहना
ईश्वर के प्रति घृणित विचार आना
यह डर बने रहना कि ऐसा नहीं किया तो प्रियजनों के साथ कुछ गलत हो जाएगा
चीजों को बार-बार मन में गिनते रहना
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केस-1 : मासिक धर्म के दौरान खुद को अलग कर लेती थी महिला
निघासन क्षेत्र की 25 वर्षीय एक महिला मासिक धर्म के दौरान खुद को परिवार से अलग कर लेती थी। वह इस दौरान स्वयं को अत्यधिक गंदा महसूस करती थी। शक होने पर परिजनों ने चिकित्सकों से सलाह ली। काउंसलिंग और दवा के बाद अब महिला की स्थिति में सुधार है।
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केस-2 : रात में बार-बार ताला और गैस चेक करती थी महिला
शहर के एक मोहल्ले की 45 वर्षीय महिला लंबे समय से ओसीडी से ग्रसित थी। वह रात में कई बार उठकर घर के ताले, कुंडी और गैस रेगुलेटर की जांच करती थी। शुरुआत में परिजनों ने इसे सामान्य माना, लेकिन समस्या बढ़ने पर जिला अस्पताल में सलाह ली गई। इलाज के बाद महिला की स्थिति में पहले से काफी सुधार हुआ है।
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