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इलाके के इकलौते स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे मनराज

Tue, 13 Jan 2015 05:12 PM IST
मैलानी (खीरी)
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105 साल के मनराज राजामंडी क्षेत्र के एकमात्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनका सोमवार को निधन हो गया। 1922 में गोरखपुर के चौरी-चौरा थाने को जलाने में उनका भी योगदान था और इस वजह से जेल भी जाना पड़ा था।
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मनराज ग्राम पंचायत सुआबोझ के राजामंडी पांच नंबर में रहते थे। जगदेव के पुत्र मनराज मूलत: गोरखपुर की तहसील भरतपुर के थाना तथा गांव चौरीचौरा के रहने वाले थे। उनके एकमात्र बेटे धनुर्धारी और पास में ही रहने वाले पूर्व प्रधान शंकरलाल ने बताया कि मनराज ने ब्रिटिश हुकूमत के दौरान सन 1922 में चौरीचौरा थाने में अपने साथियों के साथ आग लगाई थी, जिसमें उन्हें भी सजा सुनाई गई थी और दस वर्ष तक उन्होंने सजा काटी थी। धनुर्धारी ने बताया कि पिताजी अक्सर बताया करते थे कि थाना फूंकने के बाद अंग्रेज सिपाहियों ने घोड़ों की टापों से उन्हें रौंदा था। मनराज के एक पुत्र के अलावा इतवारी, सरसती, सोना, जोन्हा और लाची देवी पांच बेटियां भी हैं। वह अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। इस प्रकार राजामंडी इलाके के एकमात्र स्वतंत्रता सेनानी भी पंचतत्व में विलीन हो गए।
तंगहाली में है परिवार
मैलानी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मनराज का परिवार तंगहाली में जीवन गुजर-बसर कर रहा है। बेटे धनुर्धारी के पास मात्र 41 डिस्मिल खेती योग्य जमीन है और वह मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
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75 साल पहले आए थे राजामंडी
मैलानी। बेटे धनुर्धारी ने बताया कि पिताजी चौरीचौरा, गोरखपुर से करीब 75 साल पहले यहां आकर राजामंडी में जंगली इलाके में आकर बस गए और खेती करने लगे। तब से उनका परिवार यहीं रह रहा है।
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नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि
मैलानी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मनराज के निधन पर क्षेत्रीय सांसद तथा विधायक यहां श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचे।

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