स्वस्थ शरीर, सुरक्षित जीवन के तहत लगेगा कैंप
अमर उजाला फाउंडेशन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से तहसील धौरहरा के ब्लॉक ईसानगर अंतर्गत बाढ़ प्रभावित गांव हसनपुर कटौली के उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में 23 जुलाई को नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। शिविर में जिला अस्पताल से डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी।
बाढ़ प्रभावित गांव हसनपुर कटौली स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम है और बाढ़ प्रभावित इलाका होने के कारण यहां के लोगों को इलाज की जरूरत है। यही वजह है कि अमर उजाला फाउंडेशन ने इस बार गांव हसनुपर कटौली में स्वस्थ शरीर और सुरक्षित जीवन के तहत नि:शुल्क चिकित्सा कैंप लगाने जा रहा है। यह कैंप हसनपुर कटौली के उच्च प्राथमिक विद्यालय में 23 जुलाई को पूर्वान्ह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक लगाया जाएगा। शिविर में मौसमी बीमारियों के अलावा नेत्र रोगियों, महिला एवं बाल रोगियों को भी इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लगाए जा रहे स्वास्थ्य शिविर में जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राजकुमार, आई सर्जन डॉ. पूनम वर्मा, ईएनटी डॉ. हर्षिता अवस्थी, डॉ. विनीता सिंह, स्वास्थ्य केंद्र दुर्गापुर पड़री से डॉ. आरबी गुप्ता, फार्मेसिस्ट हरिनाथ मौर्या आदि चिकित्सक मौजूद रहेंगे। शिविर में डॉक्टरों की सलाह पर मलेरिया, टॉयफाइड, शुगर, एलएसपी, केएसपी के संभावित मरीजों की नि:शुल्क जांच होगी और दवाएं भी दी जाएंगी। शिविर में फिजीशियन, महिला चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, नेत्र चिकित्सक मौजूद रहेंगे। साथ ही आयुष चिकित्सा की भी टीम मौजूद रहेगी।
इन गांवों के मरीजों को मिलेगा लाभ
हसनपुर कटौली में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगने से इस ग्राम पंचायत के अलावा पड़ोसी गांव चंदरासा, अवस्थीपुरवा, पोखरा अजौरा, लौकाही मल्लापुर, चपकहा, ढुंढा, सीहपुर, पड़री, मिलिक, सरावल, मक्कापुरवा, मुरौआ सहित तमाम गांवों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
बदहाल है हसन कटौली का इलाका
15 किलोमीटर दूर है अस्पताल, नहीं जा पाते मरीज
ईसानगर। ब्लॉक ईसानगर का बाढ़ ग्रस्त इलाका हसन कटौली ही नहीं पड़ोस के गांव चंदरासा, अवस्थीपुरवा, मुरौआ, मिलिक, लौकाही मल्लापुर आदि दर्जनों गांव ऐसे हैं, जो बदहाल हैं। बाढ़ और कटान की विभीषिक झेल रहे अधिकांश गांव के लोग सड़कों पर बसेरा बनाए हैं, जिससे वह मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं पर नजर डालें तो हसनपुर कटौली से 12 किलोमीटर दूर स्थित ब्लॉक मुख्यालय ईसानगर में पीएचसी है, जबकि दूसरी तरफ 15 किलोमीटर दूर दुर्गापुर पड़री में पीएचसी है। इतनी दूर जाने के बाद भी लोगों का इलाज नहीं हो पाता। इलाके की आबादी करीब 50 हजार से अधिक है। यहां संक्रामक रोग दाद, खाज, खुजली, वायरल, डायरिया, खांसी, जुकाम और नेत्र रोगी हैं।