गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। तहसील में फर्जी रूप से 72 लोगों के निवास प्रमाण पत्र बनाने जाने का खुलासा हुआ है। मामला संज्ञान में आने पर एसडीएम ने जनसेवा केंद्र संचालक सहित पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इस प्रकरण में दो लेखपाल भी संदेह के घेरे में हैं, जिनके खिलाफ भी एसडीएम ने जांच के निर्देश दिए हैं।
तहसील में तैनात ग्रंट नंबर 11 के लेखपाल अविनाश कुमार मिश्र ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि अक्तूबर 2019 में तहसीलदार ने उन्हें अतिरिक्त प्रभार सौंपा। उस दौरान कुछ जालसाजों ने आधार कार्ड और प्रधान द्वारा निर्गत निवास प्रमाण पत्र आदि फर्जी साक्ष्यों को संलग्न कर निवास प्रमाणपत्र जारी करा लिए। वहीं नगरा सलेमपुर के लेखपाल अनिल त्रिपाठी ने कहा है कि गोला में क्षेत्रीय लेखपाल के रूप में तैनाती के दौरान जालसाजों ने फर्जी साक्ष्य संलग्न कर निवास प्रमाण पत्र जारी करा लिए। इस प्रकार फर्जी प्रपत्र लगाकर 72 फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी हुए। इस बात का खुलासा होने पर इस संबंध में एसडीएम अखिलेश यादव ने जांच कराई तो तहसील गेट पर हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव परसेड़िया निवासी पंकज कुमार के जनसेवा केंद्र से सभी निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन किए जाने की बात सामने आई। निवास प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन किए जाने में थाना मैलानी के कुकुहापुर निवासी नोखेलाल जो कि जनसेवा केंद्र संचालक के बहनोई का भाई है, उसका नाम सामने आया। आरोप है कि नोखेलाल ने जनसेवा केंद्र का पासवर्ड प्राप्त कर तहसील गेट पर हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव अहमदनगर निवासी नवनीत कुमार की दुकान से निवास प्रमाणपत्र ऑनलाइन किए। नोखेलाल के पास से ग्राम प्रधान गोला देहात की एक मोहर, मूल आधार कार्ड की 75 फोटो कापी, जिसमें से 35 फोटो कॉफी फर्जी जारी हुए निवास प्रमाण पत्रों में संलग्न की गई हैं। लेखपालों की जांच में नोखेलाल ने बताया कि फर्जीवाड़े में कोतवाली में तैनात एक सिपाही का बुलंदशहर निवासी चचेरा भाई प्रदीप सिंह और नगर निवासी एक व्यक्ति राकेश कुमार शामिल है। आख्या मिलने पर एसडीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर ग्रंट नंबर 11 के क्षेत्रीय लेखपाल अविनाश मिश्र और नगरा सलेमपुर के क्षेत्रीय लेखपाल अनिल त्रिपाठी ने पांचों आरोपियों पंकज कुमार, नोखेलाल, नवनीत कुमार, प्रदीप सिंह और राकेश के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467 और 468 में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
निष्पक्ष जांच होने पर हो सकता है बड़ा खुलासा
गोला गोकर्णनाथ। तहसील में अधिकारियों, पुलिस और लेखपालों की तिकड़ी की साठगांठ बड़े पैमाने पर है। सूत्र बताते हैं कि इनकी साठगांठ से फर्जी निवास, आय, जाति प्रमाण पत्र ही नहीं बनाए जाते, बल्कि मृत को जीवित और जीवित को मृतक बनाकर दस्तावेज भी तैयार कराए जाते हैं। यदि निष्पक्ष ढंग से जांच हो तो कई लेखपालों सहित जनसेवा केंद्र और बिचौलियों के नाम प्रकाश में आ सकते हैं। जन सेवा केंद्रों के माध्यम से आय, जाति प्रमाण पत्र बनाने का भी काम होता है, जिसकी जांच कराने पर उसमें भी धांधली और गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है।
निवास प्रमाणपत्र बनवाने की यह है प्रक्रिया
निवास प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में आवेदक को प्रधान या नगर पालिका परिषद के सदस्य की सील और हस्ताक्षर से जारी निवास प्रमाणपत्र, दो मूल आईडी की प्रमाणित प्रतियां, फोटो संलग्न कर एक प्रपत्र भरना होता है, जिसे जनसेवा केंद्र से गोपनीय पासवर्ड द्वारा एसडीएम के पोर्टल पर भेजा जाता है। उसके बाद एसडीएम लेखपाल के पोर्टल पर भेज देते हैं। लेखपाल द्वारा जांच के बाद आख्या देने पर एसडीएम द्वारा ऑनलाइन निवास प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
फर्जी निवास प्रमाणपत्रों का मामला संज्ञान में आने पर जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। लेखपालों द्वारा आख्या मिलने पर फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि हुई है। संलिप्त लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। फर्जी निवास प्रमाण पत्रों के बनाने में आख्या देने वाले लेखपालों की भी जांच कराई जा रही है।
-अखिलेश यादव, एसडीएम, गोला