खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को लागू करने की राह में अभी तमाम रोड़े हैं। पूर्ति विभाग में स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते पात्र गृहस्थियों के चयन में प्रशासन को पसीने छूट रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लागू होने के बाद अतिरिक्त अनाज की जरूरत पड़ेगी। मौजूदा समय में जो अनाज गोदाम हैं, उनकी धारक क्षमता मौजूदा आवंटन के लिहाज से भी कम है। अनाज का आवंटन बढ़ने पर इसके भंडारण में और ज्यादा दिक्कतें आ सकती है।
जिले में कुल 1378 सस्ते गल्ले की दुकानें हैं, इनमें 149 शहरी क्षेत्र में और 1229 दुकानें ग्रामीण क्षेत्र में हैं। शहरी क्षेत्र की 149 राशन की दुकानों में से सिर्फ 86 ऐसी दुकानें हैं जहां ऑनलाइन आवेदन पत्रों के साथ अंतिम सूची तैयार कर ली गई है। यह प्रगति 57.72 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्र की 1229 उचित दर की दुकानों के सापेक्ष 516 दुकानों पर ऑनलाइन आवेदन पत्रों के साथ अंतिम सूची तैयार हो सकी है। यह प्रगति मात्र 41.99 प्रतिशत है। करीब छह माह से चल रही इस प्रक्रिया में इतनी धीमी प्रगति को देखते हुए पात्र गृहस्थियों की चयन प्रक्रिया पूरी होने में अभी एक साल और लगने की संभावना है।
जिला पूर्ति अधिकारी, लखीमपुर खीरी डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि खाद्य
सुरक्षा अधिनियम 2013 के लिए पात्र गृहस्थियों के चयन की कार्रवाई
युद्घस्तर पर जारी है। डीएम ने इसकी नियमित समीक्षा के लिए एडीएम को अधिकृत
किया है। सूची बनाने और ऑनलाइन डेटा फीडिंग के लिए 50 कंप्यूटर खरीदे गए
हैं। 32 डेटा इंट्री आपरेटरों की नियुक्ति की कार्रवाई की जा रही है।
ब्राडबैंड कनेक्टीविटी के लिए बीएसएनएल को पत्र लिखा गया है। समय पर काम
पूरा करने का प्रयास जारी है।
स्टाफ की कमी सबसे बड़ा रोड़ा
खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को लागू करने की जिम्मेदारी पूर्ति विभाग पर है लेकिन स्टाफ की कमी उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना है। जिला पूर्ति कार्यालय में निरीक्षक के 14 पदों के सापेक्ष केवल छह निरीक्षक हैं। वरिष्ठ सहायक, आशुलिपिक, ज्येष्ठ लेखा लिपिक के पद अरसे से खाली हैं। लिपिक के 16 पदों के सापेक्ष सिर्फ नौ लिपिक हैं इनमें सात तहसीलों में एक नगर क्षेत्र में और एक जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के चार पदों के सापेक्ष सिर्फ एक कर्मचारी ही मौजूदा समय में है।
अनाज रखने को पर्याप्त गोदाम नहीं
जिले के 15 ब्लाकों में कुल 15 गोदाम हैं इनमें से धौरहरा, ईसानगर, निघासन और रमियाबेहड़ के गोदामों की भंडारण क्षमता मौजूदा आवंटन के अनुरूप ही नहीं है। यहां गेहूं खुले में रखना पड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद अनाज का आवंटन बढ़ना तय है। ऐसी दशा में अनाज भंडारण कैसे होगा यह एक बड़ा सवाल है।