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‘बाढ़-कटान, गलत सिंचाई  परियोजनाओं का परिणाम’

Wed, 31 Aug 2016 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  लखीमपुर  खीरी।
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बाढ़ और कटान - फोटो : अमर उजाला
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किसानों और बाढ़ कटान पीड़ितों की समस्याओं को लेकर भाकपा माले आज करेगी प्रदर्शन
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भाकपा माले केंद्रीय कमेटी की सदस्य कृष्णा अधिकारी ने बाढ़ कटान  पीड़ित किसानों के प्रति केंद्र और प्रदेश सरकार  की संवेदनहीनता की आलोचना करते हुए कहा कि दोनों ही सरकारें बाढ़ और कटान  पीड़ितों की समस्या के प्रति उदासीन हैं। यह दोनों सरकारों की कारपोरेटपरस्त नीतियों की ही देन है कि एक तरफ मोदी सरकार ने कारपोरेट जगत के अरबों  खरबों के बकाए को माफ कर दिया वहीं अखिलेश सरकार ने चीनी मिल मालिकों पर  गन्ना किसानों का जो बकाया था उसे माफ करने की घोषणा कर दी। 
पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें बाढ़ और कटान को प्राकृतिक आपदा घोषित कर किसानों की सहायता करने से कन्नी काट रहीं हैं। बाढ़ कटान प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि अतीत में कृषि विकास के लिए बनाई गई सिंचाई परियोजनाओं का दुष्परिणाम है। उन्होंने कहा कि 40 साल पहले  शारदा सहायक परियोजना का निर्माण शारदानगर में हुआ था इसके लिए शारदानगर से  मालपुर तक और शारदानगर से अदलाबाद तक नदी के दोनों ओर बिना किसानों को मुआवजा दिए जल संग्रहण क्षेत्र बनाया गया था। 40 साल से लगातार नदी  में सिल्ट जमा हो रही है। सिल्ट सफाई न कराने से ही हजारों लोगों को बाढ़  का सामना करना पड़ता है। 
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उन्होंने कहा कि शारदा सहायक परियोजना की संपूर्ण डूब क्षेत्र में करीब 50 हजार की आबादी है। सरकार बाढ़ और कटान  पीड़ितों को अब तक सुरक्षित स्थान पर बसाने की व्यवस्था नहीं कर पाई है।  उन्होंने बताया कि किसानों, मजदूरों, बाढ़ और कटान पीड़ितों की समस्याओं को लेकर भाकपा माले एक सितंबर को नसीरुद्दीन मौजी भवन के प्रांगण में धरना प्रदर्शन करेगी और दो सितंबर को मजदूरों के अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन में  शामिल होगी।
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