लखीमपुर खीरी। जिले के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अब तक आग बुझाने के इंतजाम नहीं थे। आरोप है कि सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) को अधिकारियों की चहेती फर्म से फायर सिलिंडर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सिलिंडर के लिए उनसे 1945 रुपये लिए गए हैं, जबकि बाजार में कीमत 1100 से 1200 रुपये है। दोनों सिलिंडरों का वजन भी एक समान यानी चार किलो है। गुणवत्ता भी एक जैसी ही बताई जा रही है।
कई सीएचओ ने बताई गई फर्म से न लाकर बाजार से सिलिंडर खरीद लिया तो उन पर अफसर भड़क गए और वेतन रोकने तक की चेतावनी दे डाली। इस मनमानी के पीछे कहीं न कहीं कमीशनखोरी के बड़े खेल की चर्चा है। इसमें सीएचओ पिस रहे हैं। वेतन बाधित होने और नौकरी जाने के डर से सीएचसओ चुप्पी साधे हैं और विभाग की प्रताड़ना झेलने को मजबूर हैं।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ सीएचओ ने बताया कि छाउछ के पास इंडियन गैस प्लांट के सामने एक दुकान से सिलिंडर खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। जो वहां से सिलिंडर नहीं ले रहा, उसका वेतन रोकने की धमकी दी जा रही है। कुछ सीएचओ ने इसको लेकर आवाज उठाने का प्रयास किया तो उनको नौकरी से हाथ धोने तक की धमकी दे दी गई। (संवाद)
अपने रुपये से सिलिंडर खरीद रहे सीएचओ
आयुष्मान आरोग्य मंदिर जन आरोग्य समिति के मद से फायर सिलिंडर खरीदने को कहा गया था, लेकिन अधिकांश आयुष्मान आरोग्य मंदिर के मद में बजट नहीं बचा है। ऐसे में काफी सीएचओ को फिलहाल अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
फायर सिलिंडर की अचानक आई याद
जिले में 339 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर पिछले कई साल से संचालित हैं। अब तक यहां आग बुझाने के इंतजाम नहीं किए गए थे। अब अचानक फायर सिलिंडर लगवाए जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि एक दिन के अंदर सिलिंडर खरीदकर प्रशिक्षण में भाग लेने का दबाव बनाया गया।
दूर-दराज से आए ग्रामीणों का इलाज करते हैं सीएचओ
जिले में सीएचसी, पीएचसी के अलावा जन आरोग्य केंद्र हैं, जिनको अब आरोग्य मंदिर बोलते हैं। यहां पर सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी) तैनात होते हैं। यह सीएचओ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज करते हैं। उचित उपचार के लिए उच्च स्तर पर रेफर करते हैं। यह केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं, जिनसे ग्रामीणों को काफी लाभ मिलता है।
जिले में 339 सीएचओ को दो दिन में दिया प्रशिक्षण
पुलिस लाइन के फायर स्टेशन पर आग बुझाने का दो दिन तक प्रशिक्षण चला। इसमें 339 सीएचओ ने प्रतिभाग किया। पहले दिन सोमवार को संबंधित फर्म की गाड़ी पुलिस लाइन के पास खड़ी थी, जहां से सीएचओ ने सिलिंडर खरीदकर प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया। मंगलवार को गाड़ी नहीं खड़ी की गई। ऐसे में सीएचओ को छाउछ में संबंधित फर्क की दुकान पर जाकर खरीदना पड़ा।
फायर सिलिंडर को लेकर जो भी बात फैलाई जा रही है, वह गलत है। सीएचओ कहीं से भी सिलिंडर खरीद सकते है। बशर्ते जीएसटी नंबर व पक्का बिल होना चाहिए। दबाव बनाने जैसे कोई बात नहीं। - डॉ. प्रमोद वर्मा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर
किसी पर कोई भी दबाव नहीं बनाया गया। प्रशिक्षण के दौरान फायर सिलिंडर होना जरूरी होता था। सीएचओ कहां से सिलिंडर लाए इस संबंध में कुछ भी पता नहीं है। न ही इसके लिए कोई दुकान ही तय की गई है। -कुलदीप सिंह, डीसीपीएम, नेशनल हेल्थ मिशन