इसे नगर पालिका की उदासीनता कहें या लोगों में जागरूकता की कमी। फिलहाल लखीमपुर शहर में स्वच्छ भारत मिशन का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। जिन घरों में शौचालय नहीं है और लोग खुले में शौच जाने को विवश हैं वे लोग भी शौचालय निर्माण के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। नगर पालिका के पिछले डेढ़ महीने के प्रयासों पर नजर डालें तो यही पता चलता है कि लोग शौचालय निर्माण को लेकर जागरूक नहीं हैं।
नगर पालिका के मुताबिक शहर में करीब 22 मकान हैं। जिन घरों में शौचालय नहीं है, उनका सर्वे कराया जा रहा है। अनुमान है कि इनमें करीब एक हजार मकान ऐसे हैं, जहां शौचालय नहीं है और इस समस्या के कारण परिवार के सदस्य खुले में शौच के लिए जाने को विवश हैं। अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार के मुताबिक स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार से चार हजार और राज्य सरकार की ओर से चार हजार रुपये शौचालयविहीन परिवारों को दिए जा रहे हैं। अगर किसी मोहल्ले में अधिकतर परिवारों के पास शौचालय निर्माण के जगह नहीं है तो नगर पालिका 52 हजार रुपये की लागत से उसी मोहल्ले में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराएगा। इस बाबत नगर पालिका ने शहरी क्षेत्र में सफाई कर्मियों को शौचालयविहीन मकानों का सर्वे का जिम्मा सौंपा है। साथ ही लोगों से नगर पालिका में आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, लेकिन पिछले डेढ़ महीनों में नगर पालिका को शहरी क्षेत्र से एक भी आवेदन नहीं मिला है। ईओ का कहना है कि स्वच्छता बढ़ाने के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है, तभी अभियान को आगे बढ़ाया जा सकेगा।