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ट्रॉली में लकड़ी भरने  गए मजदूर की मौत

Wed, 23 Nov 2016 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  लखीमपुर खीरी।
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मृत - फोटो : अमर उजाला
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शव मौके पर छोड़कर मजदूर और लकड़ी मालिक फरार 
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मृतक के मासूम पुत्र ने रंजिशन हत्या की जताई आशंका
शहर से सटे गांव छाउछ में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लकड़ी लादते समय संदिग्ध हालात में मन्नालाल गौतम की लकड़ी के बोटे की चपेट में आकर मौत हो गई। मौके पर मौजूद लकड़ी मालिक उसे लेकर एक प्राइवेट डॉक्टर के पास पहुंचा, डॉक्टर के मन्नालाल को मृत घोषित करने पर वह शव घटनास्थल पर डालकर ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य तीन मजदूरों के साथ मौके से खिसक गया। यहां तक कि परिवार वालों को भी इसकी सूचना नहीं दी। हादसे के करीब दो घंटे बाद सूचना पर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक के 13 वर्षीय पुत्र अमरदीप गौतम ने पुरानी रंजिश में पिता को मार डालने का आरोप लगाया है।
गांव छाउछ निवासी अमरदीप गौतम ने बताया कि बुधवार की सुबह करीब साढ़े छह बजे गांव निवासी अशर्फीलाल उसके घर पर आए और पिता को अंबेडकर पार्क के पास कटी पड़ी यूकेलिप्टस के बोटों को ट्रॉली में लादने की बात कहकर मजदूरी पर ले गए। साथ में ही गांव के तीन अन्य मजदूर भी थे। ट्रॉली में एक ही बोटा लद पाया था, कि दूसरा बोटा लादते समय बोटे की चपेट में उसके पिता आ गए। बाद में लकड़ी मालिक पिता को रिक्शे में लेकर बेहजम रोड स्थित एक डॉक्टर के पास गए।  वहां डॉक्टर नेमन्नालाल को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उसने शव वापस लाकर घटनास्थल पर डाल दिया और ट्रैक्टर-टॉली और तीन अन्य मजदूरों के साथ मौके से भाग गया। उसने बताया कि लकड़ी मालिक ने हादसे की खबर घर पर भी नहीं दी। गांव की एक महिला ने शव पड़े होने की जानकारी दी। जिस पर वह अपनी मां, चाचा जसकरन के साथ मौके पर गया तो पिता का शव खून से लथपथ पड़ा था। मृतक के पुत्र और छोटे भाई जसकरन ने बताया कि साथ गए मजदूरों में शामिल दो सगे भाइयों से मन्नालाल गौतम की रंजिश चल रही थी। आशंका जताई है कि दोनों आरोपी भाइयों ने लकड़ी मालिक के शह पर उसके भाई की बोटा गिराकर हत्या कर दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। 
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13 वर्ष की उम्र में ही कंधों पर पड़ा परिवार का बोझ 
 कुदरत की मार देखिए, 13 साल की उम्र खेलने-कूदने के साथ पढ़ने की होती है। इतनी छोटी सी उम्र में ही पिता का साया उठने के बाद चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे बड़े भाई अमरदीप गौतम के कंधों पर परिवार का बोझ आ गया है। पिता मन्नालाल की मौत के बाद घर में कोहराम मचा हुआ है। 
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शहर से सटे गांव छाउछ निवासी मन्नालाल गौतम दो भाई हैं। दोनों भाइयों के नाम चार-चार बीघा जमीन है। मन्नालाल के परिवार में उसकी पत्नी रामदेवी, चार पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। सबसे बड़ा पुत्र 13 वर्ष का अमरदीप है। खेतीबाड़ी खुद करने के बाद भी परिवार का खर्च पूरा नहीं होता। इसलिए मुन्नालाल मजदूरी करते थे और परिवार पालने के साथ सभी बच्चों को पढ़ा लिखा रहे थे। बुधवार को लकड़ी के बोटे की चपेट में आने के बाद छोटे-छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया हट गया। मृतक मन्नालाल का बड़ा बेटा अमरदीप कक्षा सात में पढ़ रहा है। पिता की मौत के बाद परिवार का बोझ अब उसके कंधे पर है। पोस्टमार्टम हाउस पर अपने चाचा जसकरन के साथ बैठे अमरदीप के आंसू सूख चुके थे। वह गुमसुम हालत में बैठा था। फटी पैंट-शर्ट पहने और नंगे पैर बैठे अमरदीप की हुलिया उसके परिवार की आर्थिक तंगी खुद बयां कर रहा था। 
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