लखीमपुर खीरी। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के बीच अब त्योहारों के सीजन में मिलावटखोरी के संक्रमण की चुनौती आ गई है। नवरात्र समेत कई प्रमुख त्योहार नजदीक आ रहे हैं, जिससे इन मौकों पर मुनाफाखोरी करने वाले मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने अभी मिलावटखोरी को रोकने के लिए फूड सैंपलिंग शुरू नहीं की है, बल्कि शासन से निर्देश मिलने के इंतजार में बैठी है। वहीं एक अक्तूबर से सरसों के तेल में किसी दूसरे तेल को मिलाने पर बैन लगाया जा चुका है, लेकिन अब भी बाजार में ब्लेंडेड तेल (राइस ब्रान या सोयाबीन मिक्स) बेचा जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में तो सबसे ज्यादा मिलावटी और नकली सामान की बिक्री हो रही है, जिनमें खासकर बच्चों को लुभाने वाले तरह-तरह के आइटम शामिल हैं।
इस महीने 17 अक्तूबर से नवरात्र का शुभारंभ होगा, जिसके बाद दशहरा आएगा। तो अगले महीने यानी नवंबर में दिवाली और भैया दूज सहित कई अन्य त्योहार आने वाले हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते लंबे समय के लॉकडाउन से मिलावटखोर अब तक शांत थे, लेकिन अब त्योहार, सहालगी सीजन को देखते हुए बाजार मिलावटी सामानों से पट गए हैं। खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट स्वास्थ्य से खिलवाड़ साबित होगी। नवरात्र पर पूजा सामग्री से लेकर सिंघाड़े/कुटू के आटे में भी मिलावटखोरी के मामले एकाएक बढ़ जाते हैं। मिलावटखोर इस मौके का भरपूर फायदा उठाने में जुटे हैं और मिलावटी सामानों की खेप को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। चने के नाम पर खेसारी दाल का बेसन, दूध में यूरिया की मिलावट की जा रही है। रोजमर्रा जीवन में खाद्य तेलों की डिमांड सबसे अधिक रहती है, जिससे सरसों तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट करके बेचा जा रहा है। कई कंपनियां भी सरसों तेल के नाम पर राइस ब्रान ऑयल बेचकर मोटा मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन आम तौर पर लोग इस धोखाधड़ी को समझ नहीं पाते हैं। क्योंकि पैकिंग को हूबहू तैयार किया जाता है और अपठनीय अक्षरों में तेल का विवरण लिखा जाता है। इसके अलावा खुले में बिकने में वाले सरसों तेल में भी बड़े पैमाने पर राइस ब्रॉन आयल की मिलावट की जाती है और सरसों तेल की तरह बनाने के लिए खतरनाक सिंथेटिक कलर का प्रयोग किया जाता है। खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण ने एक अक्तूबर 2020 से सरसों तेल में किसी दूसरे खाद्य तेलों को मिलाने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मिलावटी सरसों तेल की बिक्री पर रोक का अनुपालन कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग को कार्रवाई करनी है, लेकिन अधिकारियों ने अभी सुधि नहीं ली है, जिससे आम लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।
देखभाल कर ही खरीदें सिंघाड़े या कुटू का आटा
नवरात्र में व्रत रहने वाले श्रद्धालु फलाहार में कुटू और सिंघाड़े का आटा इस्तेमाल करते हैं। यह आटा महंगा होने से मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में इसमें मिलावट किए जाने की आशंका है। तो पिछले सीजन के खराब हो चुके आटे को खपाने की कोशिश हो रही है। इतना ही नहीं बाजार में देसी घी और चंदन तक मिलावटी है। त्योहार से जुड़े बाजारों में जाकर सर्वे किया। जानकारों से कमियां समझी और परखा भी। जांच पड़ताल में चौंका देने वाले तथ्य सामने आए। देसी घी के पैक पर खाने योग्य नहीं लिखा मिला। इसे जानकारी के अभाव में सस्ता होने के चलते खाने के लिए भी इस्तेमाल कर लेते हैं। यही हाल हवन सामग्री, चंदन, धूप और पूजन के अन्य सामान का है। फलों का जिक्र भी जरूरी है, क्योंकि नवरात्र में पूजा से लेकर फलाहार में इनकी उपयोगिता है। केलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे केला बहुत जल्द गलकर खराब हो रहा है।
खराब आटा बिगाड़ सकता है सेहत
सबसे ज्यादा लोगों की सेहत के लिए खतरा कुटू और सिंघाड़े के आटे से है, क्योंकि खराब आटे के सेवन से व्रत तो टूटेगा ही। साथ ही फूड प्वाइजनिंग हो सकती है, जिससे आप अस्पताल तक पहुंच जाएंगे। इस आटे को खरीदने से पहले आम लोगों के पास गुणवत्ता की पहचान करने का कोई सामान्य तरीका नहीं है। सस्ते आटे के चक्कर कतई न पड़े। दोनों सिंघाड़े और कुटू आटे का रेट 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी कुलदीप दीक्षित बताते हैं कि विश्वसनीय दुकान से ही कुटू या सिंघाड़े के आटे की खरीदारी करें। बाजार में इनकी बिक्री ज्यादातर खुले में हो रही है। इससे पैकिंग या एक्सपायरी डेट का भी पता नहीं चलता। पिसने के बाद इन्हें उपयोग करने की वैधता अधिकतम एक माह है। इसके बाद आटा खराब हो जाता है। सामान्य तौर पर नंगी आंखों से इसका पता नहीं चलता, लेकिन माइक्रोस्कोप से कीड़े नजर आएंगे। कुटू के आटे में बाजरे की मिलावट हो सकती है या फिर पुराने आटे को नए आटे में मिलाकर बेच दिया जाता है।
पूजा सामग्री में मिलावट की भरमार
पूजा सामग्री की दुकानों पर खासी भीड़ है। नवरात्र से दिवाली तक बाजार इसी तरह गुलजार रहेंगे। पूजन और खाद्य सामग्री की खरीद हो रही है। नॉट इडिबल देसी घी लिखे पैक बड़ी संख्या में बिकते मिले। कहने को यह पूजा में प्रयोग होने वाला देसी घी है, लेकिन इसका रेट डालडा से कुछ ज्यादा है। जबकि ब्रांडेड शुद्ध देसी घी औसतन 500 रुपये प्रति किलो है। इसके अलावा चंदन, धूपबत्ती, हवन सामग्री में भी काफी घालमेल है।
फलों की खरीदारी में बरतें सावधानी
नवरात्र में श्रद्धालु फलों की खरीदारी करते हैं, क्योंकि फलाहार में सेब, केले का आमतौर पर सेवन किया जाता है। केले को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए हानिकारक रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे केले जल्दी गलकर खराब हो जाते हैं। जबकि सेब को चमकदार बनाने के लिए मोम की परत चढ़ाई जा रही है।
मिलावटी खाद्य सामग्री कर सकती है बीमार
व्रत के दिनों में मिलावटी खाद्य सामग्री सेहत खराब कर सकती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतेें। विश्वासपात्र दुकानदारों से ही व्रत में खाने वाली सामग्री खरीदें। फलों को अच्छी तरह से धोने के बाद ही खाएं या फिर छील कर, क्योंकि केमिकल से पकाए गए फल खाने से डायरिया हो सकती है।
-डॉ. आरएस मधौरिया, फिजीशियन, जिला अस्पताल
शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भी समान रूप से छापा मार कार्रवाई के लिए जल्द ही टीमें गठित की जाएंगी। कार्रवाई के दौरान तहसील और पुलिस प्रशासन का भी सहयोग मांगा है। बाजार में बिक रहे कुटू और सिंघाड़ा के आटे की जांच कराई जाएगी। मिलावटी सरसों तेल के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
- कौशलेंद्र शर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए