पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े गए गैंडों में एक का काॅलर आईडी क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। इस गैंडे को ट्रैंक्युलाइज कर सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया और दोबारा कालर आईडी लगाकर उसको प्राकृतिक वन क्षेत्र में अवमुक्त किया गया है।
मार्च में अभियान चलाकर नर गैंडा हर्ष और मादा गैंडे सुषमा, राशी और दीप्ति को अवमुक्त किया गया था। इसमें रिजर्व अधिकारी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, कतर्नियाघाट और गोरखपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों और वन कर्मियों ने भी अहम भूमिका निभाई थी।
दुधवा नेशनल पार्क में मुक्त गैंडों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने अत्याधुनिक रेडियो कॉलर ट्रैकिंग सिस्टम को मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जोड़ दिया था और 24 घंटे उनकी लोकेशन पर नजर रखी जा रही थी। उप प्रभागीय वनाधिकारी दीपक कुमार पांडे के नेतृत्व में अंतर्रेंज और अंतरप्रभागीय टीमें गठित की गई थीं जो दुधवा के वन्यजीव प्रतिपालक महावीर सिंह के निर्देशन में गैंडों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थी।
बताया गया कि स्वछंद विचरण को आजाद हुई मादा गैंडा दीप्ति जो कि 12 से 13 साल की है। उसका कॉलर आईडी क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था। रिजर्व की विशेष टीम ने उसको दक्षिण सुनारीपुर के छोटा पलिया से रेस्क्यू कर दोबारा काॅलर आईडी लगाया। आईडी कार्य सफलता पूर्वक पूरा कर गैंडा को उसी स्थान पर आजाद कर दिया गया है। अब मादा गैंडा पुनः इस इलाके में विचरण कर रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस कार्य की पुष्टि की है।