लखीमपुर खीरी। जिले में बिक रहे दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच में बड़ी संख्या में नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 165 में 137 यानी 83 प्रतिशत नमूने फेल मिले।
वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जून तक 136 में 84 यानी करीब 62 प्रतिशत नमूने फेल रहे। इनमें पनीर की स्थिति सबसे खराब रही। इसके करीब 90 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। मावा के भी 75 प्रतिशत तक नमूने फेल मिले। विभाग ने 88 कारोबारियों पर 12.57 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
विभागीय जांच में दूध में पानी, स्टार्च और कार्बोनेट मिला। मावा में स्टार्च, मैदा, वनस्पति वसा और घटिया गुणवत्ता का दूध, जबकि पनीर में स्टार्च, मिल्क पाउडर, कम वसा वाला या घटिया दूध मिला। घी में वनस्पति घी, पाम ऑयल व अन्य सस्ते खाद्य तेल और दूध की मिठाई में कृत्रिम रंग, घटिया खोया व खराब गुणवत्ता का दूध मिला। आइसक्रीम में कृत्रिम रंग, घटिया दूध ठोस और मानकों से कम दूध वसा मिलने की बात रिपोर्ट में है।
विभाग ने दूध के 33 मामलों में 4.85 लाख, मावा के 10 में 1.52 लाख, पनीर के 28 में 4.20 लाख, घी के तीन में 35 हजार, मिठाई के 11 में 1.40 लाख और अन्य तीन मामलों में 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया। कुल 88 कारोबारियों पर 12.57 लाख रुपये जुर्माना लगाया जा चुका है। संवाद
2025-26 में पनीर के 39 में 35 नमूने फेल
वित्तीय वर्ष 2025-26 में दूध के 44 नमूनों में 32 (72.73 प्रतिशत), मावा के 21 में 15 (71.43 प्रतिशत), पनीर के 39 में 35 (89.74 प्रतिशत), घी के तीन में तीन (100 प्रतिशत), दूध की मिठाई के 55 में 49 (89.09 प्रतिशत) और दूध के अन्य उत्पादों के तीन में तीन (100 प्रतिशत) नमूने फेल मिले।
अप्रैल-जून में भी पनीर के 27 में 24 नमूने फेल
वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जून तक दूध के 53 नमूनों में 33 (62.26 प्रतिशत), मावा के 28 में 21 (75 प्रतिशत), पनीर के 27 में 24 (88.89 प्रतिशत), घी के छह में दो (33.33 प्रतिशत), दूध की मिठाई के 21 में तीन (14.29 प्रतिशत) और दूध के अन्य उत्पाद का एकमात्र नमूना फेल मिला।
सोमवार को दूध के 11 नमूने लिए
दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट को लेकर सोमवार को विशेष अभियान चलाया गया। सहायक आयुक्त खाद्य बृजेंद्र शर्मा के निर्देश पर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिव प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण में लखीमपुर, मोहम्मदी, धौरहरा, गोला गोकर्णनाथ, मितौली आदि क्षेत्रों से दूध के 11 नमूने जांच के लिए लिए गए। कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया गया।
दूध में सोडा या रसायन मिलाया तो होगी कार्रवाई
कारोबारियों को दूध फटने से बचाने के लिए सोडा या अन्य रासायनिक पदार्थ का प्रयोग न करने के निर्देश दिए गए। ऐसा मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। साथ ही उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं सुरक्षित दूध उपलब्ध कराने की अपील की गई।
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खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए टीमें लगातार सक्रिय रहती हैं और समय-समय पर नमूनों की जांच करती हैं। नमूना फेल होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पिछले 18 महीनों में 88 मामलों में 12 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। कार्रवाई लगातार जारी है।
-बृजेंद्र शर्मा, सहायक आयुक्त खाद्य