लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन की संभावनाएं तलाशने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई ) देहरादून की दो सदस्यीय टीम दुधवा टाइगर रिजर्व पहुंच गई। टीम ने दो दिन यहां प्रवास कर जंगली जल भैंसों के लिए जलवायु, प्राकृतवास, सुरक्षा और भोजन की उपलब्धता का अध्ययन किया।
यह टीम अपनी रिपोर्ट केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय समेत प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव को सौंपेगी। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की दो सदस्यीय इस टीम में डॉ. विबास पांडव और डॉ. सम्राट मंडल शामिल थे, जिन्होंने दुधवा टाइगर रिजर्व की बेलरायां रेंज में करीब 70 एकड़ क्षेत्रफल में फैले प्राकृतिक जल स्रोत ककराही ताल और दक्षिण सोनारीपुर रेंज स्थिति गुलरीघाट जलाशय का निरीक्षण किया।
जंगली जल भैंसों के लिए भोजन की उपलब्धता, प्राकृतवास, ग्रासलैंड, वेटलैंड, सुरक्षा, मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी देखी। साथ ही स्टाफ की क्षमता, प्राकृतिक जल स्रोत समेत गैंडों की मौजूदगी और रहन-सहन का जायजा लिया।
टीम ने खासकर जंगली जल भैंसों के लिए भोजन की उपलब्धता, प्राकृतवास और जलवायु की अनुकूलता का अध्ययन किया है। टीम के साथ दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन, उपनिदेशक दुधवा नेशलन पार्क जगदीश आर, विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवि, डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार, वन दरोगा शरीफ अहमद शामिल रहे। टीम सोमवार को वापस चली गई है।
इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद भारत सरकार के वन मंत्रालय समेत अतिरिक्त वन महानिदेशक (वन्यजीव) दुधवा टाइगर रिजर्व में जंगली जल भैंसों के पुनर्वासन की अनुमति प्रदान करेंगे। इसके बाद असम से जल भैंसों को लाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
यह एक अभिनव प्रयोग होगा। इसके बाद असम के काजीरंगा नेशनल पार्क की तर्ज पर दुधवा टाइगर रिजर्व में एक सींग वाले गैंडों के साथ-साथ जंगली जल भैंसों का भी प्राकृतवास होगा।
वर्जन
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की दो सदस्यीय टीम जल भैंसों के पुनर्वासन के अध्ययन के लिए दुधवा आई थी। टीम वापस चली गई है। टीम भारत सरकार के वन मंत्रालय समेत प्रदेश के प्रधान मुख्य वन सरंक्षक वन्यजीव को इसकी रिपोर्ट प्रेषित करेगी।
- डॉ. एच राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व