निघासन। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आबकारी निरीक्षक पर पैसे लेकर कच्ची शराब बनाने वाले आरोपियों को छोड़ने का आरोप लगाते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने दावा कि हंगामे के बाद आबकारी निरीक्षक ने 35 हजार रुपये लौटा दिए।
कच्ची शराब के खिलाफ अभियान के तहत आबकारी विभाग ने बृहस्पतिवार को छापा मारकर तिकुनिया कोतवाली क्षेत्र के औंधरा निवासी रमेश, रंजीत, संतराम, राहुल और बोकरिहा के रमेश को पकड़ा था, जिन्हें बाद में आबकारी कार्यालय ले आया गया। आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाए आबकारी निरीक्षक गिरीश कुमार ने उनको अपने कक्ष में बंद कर प्रति व्यक्ति 10-10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, जिस पर चार लोगों से 35 हजार रुपये मिलने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि, एक आरोपी से पैसे न मिलने पर उसे बंद रखा गया।
इस बात की जानकारी होने पर गांव के ही भाजपा बूथ के अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद आबकारी कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि आबकारी निरीक्षक ने उनसे अभद्रता करते हुए उन्हें वहां से चलता कर दिया। मामले की जानकारी होने पर भाजपा के जिला महामंत्री विनोद लोधी, देवेंद्र चतुर्वेदी, पूर्व प्रधान अजय गुप्ता, दिलीप जायसवाल, शशिकांत चतुर्वेदी, अशोक चौधरी समेत करीब 22 कार्यकर्ता आबकारी कार्यालय पहुंचे, जहां पर करीब एक घंटे तक आबकारी निरीक्षक से उनकी नोकझोंक होती रही। उसके बाद आबकारी निरीक्षक ने ताला खोलकर रमेश को बाहर निकाला।
भाजपा कार्यकर्ता रिश्वत लौटाने के बाद ही वहां से जाने पर अड़े रहे, जिसकी सूचना मिलने पर कोतवाली प्रभारी डीके सिंह ने किसी तरह कार्यकर्ताओं को शांत कराते हुए आबकारी निरीक्षक के द्वारा लिए गए 35 हजार रुपये वापस करवाए। उसके बाद पकड़े गए आरोपी संतराम ने पुलिस को तहरीर देकर मामले में कार्रवाई की मांग की।
सीओ पीके सिंह ने फोन पर भाजपा कार्यकर्ताओं से जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। करीब तीन घंटे तक अड़े रहने के बाद कार्यकर्ता वहां से लौटे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आबकारी सचिव और डीएम से मामले की जांच कर पूरे स्टाफ को हटाने की मांग की है।
शराब बनाते समय सभी को पकड़ा गया था। अन्य काम में व्यस्तता के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी थी और जिसने पैसा लिया था, उसने लौटा दिया है। मेरा रुपये से कोई लेना देना नहीं है।
- गिरीश कुमार, आबकारी निरीक्षक
पैसे लेने से नाराज हुए कार्यकर्ता
पकड़े गए युवक रमेश के परिवार वाले पांच हजार रुपये लेकर उसे छुड़ाने पहुंचे, लेकिन कार्यकर्ताओं को देखकर आबकारी निरीक्षक ने पैसा लेने से मना कर दिया। उसके बाद परिवार वाले जब सिपाही के पास पहुंचे तो सिपाही ने जैसे ही पैसे लेने के लिए हाथ बढ़ाया। इसी बीच कार्यकर्ता आ गए। कार्यकर्ताओं को देखकर सिपाही ने भी पैसा लेने से मना कर दिया और वहां से चला गया।
पुलिस के आने के बाद गायब हुआ आबकारी स्टाफ
जब पुलिस कार्यालय में पहुंची उस समय दो सिपाहियों के अलावा आबकारी निरीक्षक किनारे खड़े थे। कोतवाली का स्टाफ आने के बाद आबकारी का पूरा स्टाफ वहां से चला गया।
मामले की तहरीर मिली है। जांच की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
- पीके वर्मा, सीओ
पैसा लेने का कोई मामला सामने नहीं आया है। मैं खुद मौके पर था। जिन लोगों को पकड़ा गया था उन पर कार्रवाई की जा रही है।
- कुलदीप दिनकर, जिला आबकारी अधिकारी