लखीमपुर खीरी। मितौली के जलालपुर गांव में पांच साल की अंशू की हत्या के रहस्य से पर्दा सात महीने बाद भी नहीं उठ सका है। जबकि इस मामले में एक युवक की पुलिस हिरासत में मौत के बाद बवाल भी हुआ था। शुरुआत में तेजी दिखाने के बाद पुलिस फिर लापरवाही का रवैया अख्तियार किए हुए है।
तीन अप्रैल को थाना क्षेत्र के पकरिया जलालपुर निवासी अनूप कुमार की पांच वर्षीय मासूम पुत्री अंशू घर के बाहर खेलते हुए गायब हो गई थी। अंशू की तलाश में परिजन और पुलिस लगी थी कि एक दिन बाद ही चार अप्रैल को उसका शव घर से 100 मीटर की दूरी पर बरामद हुआ। शव को देखने के बाद परिजन और ग्रामीणों ने हत्या का अंदेशा जताया था। अंशू के चेहरे और गले पर चोटों के निशान थे। उसका चेहरा खुला हुआ था, जबकि उसका शरीर पत्तों से ढका था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई थी। घटना के कुछ दिन बाद तक परिजन किसी से कोई रंजिश न होने की बात कहते रहे, लेकिन 10वें दिन परिजनों ने गांव के ही आशाराम पर शक जाहिर किया था। पुलिस ने आशाराम से पूछताछ की, लेकिन हिरासत में ही उसकी मौत हो गई। आशाराम के परिजनों ने पुलिस की पिटाई मौत होने की बात कहते हुए हंगामा किया था।
अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। उधर अंशू हत्याकांड के सात महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। घटना स्थानीय पुलिस से लेकर अधिकारियों तक के जेहन से उतर गई। इसी के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मासूम अंशू के परिजन आज भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। संवाद
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घटना के बाद से पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। तमाम प्रयासों के बाद भी घटना संबंधी कोई भी ठोस सबूत हाथ नहीं लगा है। छानबीन की जा रही है।
राजू राव, एसओ मितौली