शिक्षा, जागरूकता की कमी कैशलेस लेनदेन में बाधक
पेट्रोल पंप, बड़े शोरूम तक ही सीमित हैं स्वाइप मशीनें
नोटबंदी के बाद कैशलेस लेनदेन तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। जिले में अभी तक कुछ शापिंग मॉल, पेट्रोल पंपों, कुछ इलेक्ट्रानिक्स दुकानों, सराफा, कपड़ों के बड़े शो रूम पर स्वाइप मशीनें लगी हैं। बावजूद इसके बहुत कम लोग ही स्वाइप मशीनों के जरिए लेनदेन कर रहे हैं। इधर बैंकों से पर्याप्त कैश मिलने से भी कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ते कदम थम गए हैं।
शिक्षा और जागरूकता की कमी के चलते अधिकतर लोग कैशलेस एकोनॉमी के बारे में जानते ही नहीं। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनके पास एटीएम और क्रेडिट कार्ड हैं लेकिन वे उनका इस्तेमाल करना नहीं जानते। दुकानदारों की बात करें तो वे स्वाइप मशीनों के जरिये भुगतान लेने से इसलिए परहेज करते हैं कि एक हजार रुपये से अधिक का भुगतान लेने पर कुछ धनराशि की कटौती हो जाती है। बिजली, पानी, टेलीफोन के बिल पेटीएम, आधार कार्ड पैन कार्ड और क्रेडिट कार्ड से करने में लोग रुचि नहीं दिखा रहे हैं। बैंक प्रबंधकों का कहना है कि स्वाइप मशीनों की मांग बढ़ी है। मांग के अनुरूप मशीनें स्टाल भी की जा रही हैं लेकिन मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।
दो राशन की दुकानों पर होगा कैशलेस लेनदेन
जिले में दो राशन की दुकानें भी कैशलेस होने जा रही हैं। लखीमपुर ब्लाक के खेतौसा गांव और मोहम्मदी ब्लाक के खेतौरा गांव में सभी राशन कार्ड धारकों के बैंक एकाउंट और मोबाइल नंबर हैं। इन्हें आधार कार्ड से लिंक किया जा रहा है। खेतौसा गांव में 177 और खेतौरा में 602 कार्ड धारक है। जिला पूर्ति अधिकारी अभिनव सिंह ने बताया कि इन गांवों में उपभोक्ताओं को राशन लेने पर नकद भुगतान नहीं करना पड़ेगा उनके खाते से पैसा डेबिट होकर कोटेदार के खाते में क्रेडिट हो जाएगा। इससे कोटेदार वितरण में हेराफेरी नहीं कर सकेगा।
कैशलेस इकोनॉमी के लिए बैंकों की तैयारी पूरी है। मांग के अनुरूप स्वाइप मशीनें स्टाल की जा रही हैं। जागरूकता के अभाव में कैशलेस एकोनॉमी अपेक्षा के अनुरूप परवान नहीं चढ़ पा रही है।
-डॉ. एके द्विवेदी, लीड बैंक मैनेजर, लखीमपुर खीरी