शहर से सटे सैधरी ग्राम सभा में सड़क किनारे सालों से काबिज करीब 12 से अधिक लोगों के कच्चे-पक्के मकान पर शनिवार को तहसील प्रशासन ने जेसीबी चलवा दी। प्रशासन की माने तो कोर्ट के अनुपालन में ग्रामसभा की आरक्षित भूमि पर काबिज अवैध कब्जेदारों पर कार्रवाई की गई है। वहीं पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन ने कुछ भूमाफिया और रसूखदार लोगों के दबाव में सिर्फ उनके घरों को तोड़ा है, जबकि कई औरों पर कार्रवाई नहीं की गई।
कोतवाली सदर के सैधरी गांव में बाईपास के किनारे रहने वाले पवन, सुरेंद्र, घनश्याम, महेश, विनोद, देवेंद्र, उमाशंकर, गुड्डू, सुमन व अनुपमा आदि ने बताया कि वह लोग सड़क किनारे ग्राम समाज के गाटा संख्या 309 मे पिछले तीस-पैंतीस सालों से रह रहे हैं। उनके मकानों के पीछे की कुछ जमीन शहर निवासी एक डेयरी संचालक ने खरीद रखी है। वहीं चिलिंग प्लांट कारोबारी ने ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाकर, मकानों को हटाने को लेकर कोर्ट में रिट दायर की थी। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ खंड पीठ में था। तीन जनवरी को तहसील प्रशासन ने नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जगह खाली करने का आदेश दिया था। इधर रविवार शाम नायब तहसीलदार सदर डॉ. लाल कृष्ण, लेखपाल कैलाश वर्मा आदि राजस्व कर्मी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जेसीबी से कब्जेदारों को हटाने की कार्रवाई की। इससे कब्जेदारों में हड़कंप मच गया। पीड़ित परिवार वालों का कहना है कि हम लोग बेघर हो गए हैं। हमारे पास जो छत बनीं थी, वह भी तोड़ दी गई। पीड़ितों ने कार्रवाई में प्रशासन पर भेदभाव का भी आरोप लगाया।
सैधरी में श्मसान भूमि और रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। नोटिस भी दिया गया था। अमल न करने पर कार्रवाई की गई है। एक राइस मिल का भी कुछ हिस्सा नाले पर है, उसको भी जल्द हटाया जाएगा।
डॉ. लाल कृष्ण, नायब तहसीलदार सदर