आखिरकार 16 दिन बाद वह मंगल दिन आया और मंजीत अपने अन्य 40 मजदूर साथियों के साथ टनल से बाहर आया। अमर उजाला से बातचीत में मंजीत की मां ने बताया कि पिता ने पुत्र को माला पहनाकर और माथा चूमकर दूसरा जन्म मानते हुए स्वागत किया।
पैसों की किसे चिंता... बेटा ही असली धन
पहले खुद के जेवर गिरवी रख मंजीत को कमाने के लिए भेजना और फिर सुरंग में फंसने पर बहू के जेवर गिरवी रखकर मिले पैसे से पिता के उत्तरकाशी जाने पर मंजीत की मां को कोई अफसोस नहीं है। वह कहती हैं कि गिरवी सामान व पैसों से उन्हें मोह नहीं है। हमारा बेटा असली धन है।
एसडीएम को बताया दर्द... अब तक नहीं मिला न्याय
बुधवार एसडीएम अश्वनी कुमार से मंजीत की मां चौधराइन से मिलने पहुंचे। बताया कि आपका बेटा शुक्रवार को घर आ जाएगा। इस पर खुशी जताते हुए चौधराइन ने शिकायत भी की। कहा कि उनके बड़े बेटे दीपू की मौत की न्यायिक जांच अभी भी चल रही है। हमें न्याय नहीं मिला है। उन्होंने एसडीएम को दीपू की मौत के बाद हो रही जांच से जुड़े कागज भी सौंपे। एसडीएम को बताया कि वह प्राथमिक विद्यालय में रसोइया का काम कर रही हैं। उसी से परिवार का गुजर बसर हो रहा है।