बांकेगंज/मैलानी। चकमा देकर बुधवार शाम मैलानी के गांव नारंग और कुरियानी में उत्पात मचाने के बाद नेपाली हाथियों का झुंड फिर मड़हा जंगल लौट आया। मैलानी के इन गांव उत्पात मचाने पर इन हाथियों को आग जलाकर और लाठी डंडे दिखाते हुए शोर मचाकर लौटने को मजबूर किया। इन गांवों में हाथियों ने काफी नुकसान किया।
किशनपुर सेंक्चुरी में डेरा डाले नेपाली हाथी बीते चार दिन से लगातार बांकेगंज के से सटे पहाड़नगर गांव के खेतों में धावा बोल रहे थे। पहाड़नगर की ओर हाथियों के कदम रोकने के लिए वन कर्मी और पश्चिम बंगाल से आए 24 ट्रैकर्स अलग-अलग रास्तों पर इनकी कड़ी निगरानी कर रहे थे। निगरानी के बढ़ते दबाव के चलते बुुधवार शाम हाथियों के झुंड ने निगरानी टीमों को चकमा देकर अपना रास्ता बदल दिया। मड़हा जंगल से निकलकर रुख कोरजोन, डीटीआर बफरजोन जंगलों की सीमा को ओर किया। बड़ी नहर लांघ कर मैलानी रेंज की खास बीट के कुरियानी और नारंग गांव जा धमके। कई किसानों की धान और गन्ने की फसलों को रौंदा। कुरियानी में पुत्तूलाल का चार बीघा, सियाराम का तीन बीघा गन्ना, राम औतार के एक बीघा धान को नुकसान पहुंचाया। हाथियों के चिंघाड़ सुनकर लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। रेंजर केपी सिंह, आरपी सिंह, फॉरेस्टर शमशेर सिंह, गणेश शुक्ला आदि पहुंचे। इससे पहले सैकड़ों ग्रामीण हाथों में जलती टार्च, लाठी, डंडे आदि लेकर खेतों की ओर पहुंच चुके थे। शोरगल की आवाज सुनकर हाथियों का झुंड वापस मड़हा जंगल लौट गया।