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स्कूल खोलने का फैसला उचित नहीं...बच्चों से परिवार तक पहुंचेगा संक्रमण

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लखीमपुर खीरी। अनलॉक-5 में शासन ने भले ही 19 अक्तूबर से सशर्त स्कूल खोलने की अनुमति दे दी हो, लेकिन न तो अभिभावक इसे उचित मान रहे हैं और न ही डॉक्टर। अभिभावकों का तो सीधा कहना है कि बच्चों के मामले में कोई रिस्क नहीं लेगें। वहीं डॉक्टर भी संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं मान रहे। डॉक्टर बताते हैं कि स्कूल खुलने पर यदि कोई बच्चा संक्रमित हो गया तो उसका परिवार भी चपेट में आएगा, जिससे स्थिति और भयानक होगी। भले ही स्कूल संचालक कोविड-19 से बचाव के लिए तमाम इंतजामों का दावा कर रहे हों। मगर, अभिभावकों को चिंता है कि एक बारगी बच्चे स्कूलों में सुरक्षित रहेंगे, लेकिन घर से स्कूल जाते और फिर वापस आते समय रास्ते की गारंटी कौन लेगा। उधर, स्कूल संचालकों का कहना है कि शासन की गाइड लाइन के अनुसार ही स्कूलों में काम होगा।
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यह समय स्कूल खोलने के लिए उचित नहीं है। जिले में संक्रमितों की संख्या भले ही घट रही हो लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों को कोरोना से सुरक्षित रख पाना संभव नहीं होगा। हम मानते हैं कि स्कूल वालों ने बेहतर इंतजाम किए होंगे। मगर, रिक्शे या बस से स्कूल जाते समय रास्ते की जिम्मेदारी कौन लेगा। फिलहाल बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
-सरिता गुप्ता, अभिभावक
संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा है। सैनिटाइजर, मास्क, ग्लब्स जैसे सुरक्षा के तमाम उपाय बाद में हैं। मगर, सबसे जरूरी है सामाजिक दूरी। जो स्कूलों में बच्चों के बीच हो पाना संभव नहीं है। यदि बच्चा संक्रमित हुआ तो परिवार भी चपेट में आएगा।
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-आरती गौड़, अभिभावक
जिले में संक्रमितों की संख्या कम हो रही है, लेकिन अभी खतरा टला नहीं। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजने से डर लग रहा है। बच्चे न तो स्कूल में सामाजिक दूरी कायम रख पाएंगे और न ही कोरोना से बचाव की गाइड लाइन का पालन ही कर सकेंगे। कोरोना को देखते हुए बच्चों को अभी स्कूल भेजने का कोई सवाल ही नहीं।
-शिल्पी मिश्रा, अभिभावक
जिस तरह से संक्रमित निकल रहे हैं उससे सर्दी में हालत ठीक हो जाएंगे ऐसा नहीं लगता। स्कूल वाले तो दावा कर रहे हैं। मगर, खतरा अभी कम नहीं हुआ। जब ऑनलाइन पढ़ाई हो ही रही है तो स्कूल खोलने की जल्दबाजी क्यों। फिलहाल अभी बच्चे को स्कूल भेजने का सवाल ही नहीं।
-दीपमाला, अभिभावक
शासन के निर्देश पर स्कूल और कॉलेज 19 अक्तूबर से खुल रहे हैं। एक डॉक्टर होने के नाते सलाह है कि कोविड नियमों के तहत स्कूल प्रबंधन व्यवस्था करे यदि इसमें लापरवाही बरती गई तो कोरोना संक्रमण फैलने से कोई रोक नहीं सकता। जरूरी है कि जो गाइडलाइन जारी की गई है उसी के अनुरूप ईमानदारी से पालन किया जाए।
-डॉ. अखिलेश शुक्ला मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
शासन ने स्कूल खोलने की गाइड लाइन जारी कर दी है, लेकिन डीएम के आदेश के बाद ही स्कूल खुलेंगे। स्कूल खोलने से लेकर छात्रों को बुलाने के लिए जो निर्देश मिलेंगे, उनका पूरी तरह से पालन होगा। वैसे भी बच्चों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है।
-राकेश वर्मा, प्रबंधक आरएम ज्ञान दायिनी इंटर कॉलेज
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कोरोनाकाल में 19 से स्कूल खोलने की गाइड लाइन जारी
दो पालियों में संचालित होंगी नौ से 12 की कक्षाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। स्कूल खुलने को लेकर चल रही अटकलों पर रविवार को विराम लग गया। शासन ने विद्यालय खोलने से लेकर छात्रों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि जिले में स्कूल डीएम की अनुमति मिलने पर ही खुलेंगे। इसके लिए सोमवार को कलक्ट्रेट में स्कूल संचालकों के साथ बैठक होनी है। डीआईओएस हयात अली अंसारी ने बताया कि विद्यालय खोलने के लिए शासन ने निर्देश जारी कर दिए हैं। कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं दो पालियों में चलाई जाएंगी। उन्होंने प्रधानाचार्यों को स्कूल परिसर, कमरे, शौचालय आदि को सैनिटाइज कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य ऐसी व्यवस्था करें कि सुबह की पाली में बच्चों के आने से पहले स्कूल परिसर सैनिटाइज हो और यही क्रम दूसरी पाली में छात्रों के आने से पहले दोहराया जाए। स्कूल में पल्स मीटर, थर्मल स्कैनर एवं सैनिटाइज मशीन होना अनिवार्य है। डीआईओएस ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए स्कूल की ओर से किए जा रहे दावों का निरीक्षण करने के लिए हर तहसील में दो-दो नोडल अफसर नामित किए जाएंगे। जो समय समय पर स्कूलों का निरीक्षण कर मौजूद व्यवस्थाओं का जायजा लेगें।
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शासन के निर्देश
-यदि छात्र स्कूल बस से आते हैं तो उन्हें रोजाना सैनिटाइज कराने के साथ सामाजिक दूरी का पालन कराया जाए।
-छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारियों का मास्क पहनाना अनिवार्य हो, स्कूल में अतिरिक्त मास्क भी रखे जाएं।
-प्रार्थना सभा से लेकर कक्षाओं में छात्रों के बीच छह फुट की दूरी अनिवार्य हो।
- ऑनलाइन पढ़ाई व्यवस्था जारी रहेगी। जिन छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है उन्हें प्राथमिकता देकर स्कूल बुलाया जाए।
-उपस्थिति को लेकर स्कूल संचालक लचीला रुख रखें। किसी छात्र को स्कूल आने के लिए बाध्य नहीं किया जाए।
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