बिजुआ में नदी के बीच बसे गांव रामपुर तक सर्वे के लिए नाव से जाते शिक्षक। संवाद
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बिजुआ। बुनियादी तालीम पर हर बच्चे का हक है, लेकिन जब बच्चे स्कूल से काफी दूर हों और बच्चों और किताबों के बीच नदियों का फासला हो तो उसे दूर कर इस ज्योति को जलाना किसी पुण्य से कम नहीं। ऐसे ही बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश में रामगनर कलां के शिक्षक लगे हुए हैं।
बिजुआ ब्लॉक के रामनगर कलां का एक मजरा रामपुर तीन दशक से नदी के उस पार बसा है, अगर ठीक से आकलन करें तो रामपुर के उत्तर दिशा और दक्षिण दिशा में शारदा नदी बहती है। इस मजरे तक पहुंचने के लिए रामनगर कलां के घाट से प्राइवेट नाव पर अप्रशिक्षित नाविकों के सहारे पांच किमी और बाद में पैदल सफर तय करना पड़ता है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत छह से 14 साल तक के बच्चों को बुनियादी शिक्षा दिलाने के कानून के तहत सरकार पहले सभी बच्चों का सर्वे करवाती रही है, इसी के तहत रामनगर कलां के शिक्षामित्र शिक्षक अरविंद शुक्ला ऐसे बच्चों के सर्वे के लिए पांच किमी चौड़ी शारदा की विकराल धारा को नाव से पारकर पहुंचे। इस गांव में 64 बालक और 67 बालिकाएं शिक्षा से वंचित हैं। अब इन 131 बच्चों के लिए शिक्षा विभाग कोई योजना बनाएगा जिससे इन तक शिक्षा की किरण पहुंचे। इसके अलावा बझेड़ा स्कूल के दो मजरे भी नदी के बीच हैं, इन्हें भी स्कूलों तक लाना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है।