बीच सत्र में स्कूल बंद, इलाके में जूनियर के बाद सरकारी स्कूल नहीं
भले ही विभागीय गड़बड़ी के चक्कर में नकारा में खुलने वाला राजकीय हाई स्कूल बांकेगंज खुल गया हो। लेकिन इसके बंद होने से गरीब बच्चों की पढ़ाई अधर में लटक गई है। विभाग उनकी पढ़ाई जारी रखने का दावा तो कर रहा है, लेकिन अभिभावक स्कूल बंद होने से चिंतित हैं। खास यह कि इस स्कूल में 31 विद्यार्थियों में 16 बालिकाओं ने दाखिला लिया था। आखिर इस तरह कैसे साकार होगा ‘पढ़े बेटियां, बढ़े बेटियां’ का सपना।
बांकेगंज कस्बे में जूनियर हाईस्कूल तक की पढ़ाई की ही सरकारी व्यवस्था है। मजदूर पेशा लोगों की संख्या अधिक होने के कारण वह अपने बच्चों को निजी स्कूूलों में पढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, जिससे अधिकांश की पढ़ाई छूट जाती थी। जुलाई में जब यहां राजकीय स्कूल खुला तो लोगों को अपनी पढ़ाई की न सिर्फ उम्मीद बंधी, बल्कि गरीब बेटियों के सपने साकार हो गए। यही वजह रही कि बिना किसी प्रचार प्रसार के कुल 31 विद्यार्थियों ने अपना दाखिला कराया, जिसमें 16 बालिकाओं और 15 बालकों ने प्रवेश लिया। विगत शुक्रवार को अचानक बीच सत्र में स्कूल बंद होने से एक बार फिर उनकी पढ़ाई पर ब्रेक लग गया है। बालिकाओं के अभिवावक संजय कुमार, श्रवण कुमार, राम सिंह, पप्पू, मिट्ठू लाल, आशाराम, श्रीराम, राम सागर, शिव दयाल, बलराम, नेतराम, सियाराम आदि का कहना है कि यदि यह स्कूल बंद किया जाता है, तो इसके बदले कस्बे में दूसरा राजकीय हाईस्कूल या इंटरमीडिएट कॉलेज खोला जाए। ताकि सरकार का बेटियां पढ़ाएं-बेटियां बढ़ाएं का सपना साकार हो सके।
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बेटियां बोलीं, वह इतनी दूर परीक्षा देने कैसे जा पाएंगी
छात्रा अंजली कुमारी, अंशिका चौधरी, आशा देवी, डॉली देवी, क्रांती देवी, मंजेश देवी, मनोरमा, नेहा देवी, पम्मी देवी, राखी, रीना देवी, रोली भारती, रोशनी देवी, सीतू देवी, वर्षा देवी और ललिता का कहना है, जिस प्राइवेट स्कूल में उन्हें संबद्ध किया गया है, उन्होंने बाद में न पढ़ाया तो वह लोग छह किलोमीटर दूर कुकरा टाउन कैसे जा पाएंगी। उन्होंने मांग की है कि गरीबों की बेटियों के भविष्य के लिए बांकेगंज कस्बे में ही राजकीय हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेज खोला जाए। ताकि पढ़ाई के बाद वे अपने पैरों पर खुद खड़ी होने के अलावा दो परिवारों का नाम रोशन कर सकें।
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जनप्रतिनिधियों का नहीं गया ध्यान
गलती डीआईओएस दफ्तर की और खामियाजा भुगत रहे छात्रों और अभिभावकों की इस समस्या की ओर किसी भी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं गया है। वोट की आस में हर गरीब के सुख दुख में दंभ भरने वाले जनप्रतिनिधियों की इस अनदेखी पर भी अभिभावकों ने रोष जताया है। अभिभावकों का कहना है कि नेताओं को तो सिर्फ वोट से मतलब होता है।
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छुट्टी खत्म होने पर हो सकती है कार्रवाई
बीच सत्र में स्कूल बंद करने के मामले में डीएम आकाशदीप भी गंभीर हैं। उनका कहना है कि आईएएस वीक में होने के कारण वह पूरे मामले की पड़ताल नहीं कर पाए हैं। छुट्टियां खत्म होते ही मंगलवार को देखेंगे। वहीं संयुक्त शिक्षा निदेशक, लखनऊ मंडल दीपचंद ने भी कहा है कि उन्होंने डीआईओएस से पूरी रिपोर्ट मांगी है, जिसे वह मंगलवार को देखेंगे। इसके बाद तय करेंगे कि गलत ढंग से स्कूल खोलने के पीछे किसकी गलती है? इस तरह छुट्टियां खत्म होने पर मामले में कार्रवाई हो सकती है।