शिव भक्तों के लिए है दर्शनीय और रमणीक स्थल
पूर्व में जाना जाता था प्राचीन हनुमान मंदिर के नाम से
मोहम्मदी मार्ग पर गांव कंजा स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर अब कंजा देवस्थान के नाम से प्रसिद्ध है। देवस्थान पर द्वादश ज्योर्तिलिंग स्थापित है। सावन में यहां कांवड़ियों के लिए पूरे माह फलाहार, चाय और भंडारे की व्यवस्था रहती है।
नगर से दो किमी दूर कंजा ग्राम स्थित प्राचीन बरमबाबा देवस्थान की स्थापना 60 वर्ष पूर्व स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने की थी। उस समय यहां चारों ओर जंगल, जमीन ऊबड़ खाबड़, कटीली झाड़ियां थीं। स्वामीजी ने मेहनत कर जमीन समतल कराई और इस स्थान के प्राकृतिक वातावरण में पीपल के पेड़, कच्चे कुएं के पास कुटी बनाकर ईश्वर की भक्ति लीन हो गए। क्षेत्रीय गन्ना किसानों और दान दाताओं के सहयोग से यहां हनुमान जी की विशाल प्रतिमा स्थापित हुईं, जो लोगों की अगाध श्रद्धा का पर्याय बनी है। मान्यता है कि यहां मानी गई हर मनौती शीघ्र पूरी होती है। स्वामी विश्वात्मानंद ने वृद्धावस्था के कारण मध्यप्रदेश भानपुरा मठ मंदौर के स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ युवाचार्य के यहां आने पर उन्हें देवस्थान की चल-अचल संपत्ति की वसीयत कर देवस्थान के जीर्णोद्धार का आग्रह किया। जिस पर स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने शिष्य राजेश गुप्ता गुड्डन और अवधेश जायसवाल को कंजा देवस्थान हनुमान मंदिर के जीणोद्धार की जिम्मेदारी सौंपी। इनके प्रयास और दानदाताओं के सहयोग से यह स्थान अत्यंत रमणीक और दर्शनीय हो गया है। सावन में हरिद्वार, फर्रुखाबाद के कांवड़ियों के लिए देवस्थान पर पूरे सावन भर नि:शुल्क विश्राम, फलाहार और भंडारे की व्यवस्था की जाती है जिससे यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है यह स्थान
कंजा देवस्थान पर मंदिर में स्थापित विशालकाय पातालेश्वर हनुमानजी की मूर्ति जिनके कंधों पर विराजे श्रीराम और लक्ष्मण, पैरों के नीचे पड़ा अहिरावण, 12ज् योर्तिलिंग , गणेश, कार्तिकेय, मां पार्वती, नंदी, सूर्य देव की प्रतिमाएं, प्राचीन कुआं, हरी भरी नक्षत्र वाटिका स्थापित है। देवस्थान के चार हजार वर्गफुट में बना सत्संग स्थल, भोजनालय, चार शौचालय, स्नानघर दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के सुविधार्थ नि:शुल्क उपलब्ध हैं।
इनका होना है निर्माण
कंजा देवस्थान पर मां काली, मां सरस्वती का मंदिर, नवग्रह धाम, भंडार ग्रह, पार्क, गौशाला, संतों के रहने के लिए कमरे, स्कूल के लिए 20 कमरे, वृद्धाश्रम, नए शौचालय, स्नानगृहों का निर्माण प्रस्तावित है, जिसके लिए दानदाताओं से संपर्क चल रहा है।