दूसरे प्रांतों से अंग्रेजी शराब लाकर खीरी में खपाई जा रही है। शराब की तस्करी पर आबकारी विभाग अंकुश नहीं लगा पा रहा है। इससे एफएलटू गोदाम से होने वाली प्रतिदिन की निकासी में गिरावट दर्ज की गई हैै। पिछले तीन माह में औसतन 27 से 30 फीसदी तक अंग्रेजी शराब की बिक्री घट गई है। लिहाजा राजस्व लक्ष्य को प्राप्त करने में विभाग को मुश्किलें आ रही हैं। शराब माफिया का नेटवर्क मजबूत होने के चलते आबकारी टीम की छापेमार कार्रवाई भी बेअसर साबित हो रही है।
वित्त वर्ष 2015-16 में सरकार ने शराब बिक्री से 142.07 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य निर्धारित कर रखा हैै। जिले में अंग्रेजी शराब की 92 दुकानें और दो माडल शॉप संचालित हैं। जबकि देशी शराब की 257, 66 बीयर और पांच बार हैं। देशी शराब की दुकानों का कोटा पहले से ही दुकानवार फिक्स कर दिया जाता हैै। जबकि अंग्रेजी शराब में ऐसा नियम नहीं है। इस वर्ष भी अंग्रेजी शराब के दामों में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई है, जिससे पड़ोसी राज्यों से अंग्रेजी शराब की तस्करी बढ़ गई है। क्योंकि हरियाणा और चंडीगढ़ में शराब के रेट काफी कम होने के कारण तस्करों के यह धंधा मुनाफे का साबित हो रहा है। पिछले वर्ष 2014 में मितौली, मैगलगंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से लाकर बिक्री के लिए रखी गई अंग्रेजी शराब बरामद भी की जा चुकी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अंग्रेजी शराब की बिक्री में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसने आबकारी विभाग की नींद हराम कर दी है। अप्रैल से जुलाई तक 27 से 30 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है।
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ये है स्थिति
आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2015 में पिछले वर्ष की भांति शराब बिक्री हुई थी। इसके बाद मई 2015 में अंग्रेजी शराब की 71,125 बोतलें बिक्री हुई हैं, जबकि मई 2014 में एक लाख से अधिक बोतलें बिक्री हुई थीं। जून 2015 में 57215 बोतलें बिकी हैं, जबकि जून 2014 में 82376 बोतलें बिक्री हुई थीं। जुलाई 2015 में भी 27 फीसदी कमी आई है।
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कोट..
शराब तस्करी की शिकायत मिलने पर फौरन कार्रवाई की जाती है। शराब दुकानों का रूटीन चेकअप भी कराया जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अंग्रेजी शराब की बिक्री घटी है, जिसके कारणों के बारे में पता लगाया जा रहा हैै।
-संतोष कुमार, प्रभारी आबकारी अधिकारी