लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व के घने जंगल न केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज से अनूठे हैं, बल्कि यहां की जैव विविधता भी बेहद समृद्ध है। इसके चलते बाघों की संख्या ही नहीं अन्य वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पांच प्रजातियों के हिरनों का एक साथ बसेरा होना दुधवा टाइगर रिजर्व की खासियत है। यहां से लुप्त हुए गैंडों को फिर से उनके पुरखों की जमीन पर बसाने का अनूठा प्रयोग भी दुधवा के अनुकूल वातावरण के कारण सफल हुआ है।
दुधवा टाइगर रिजर्व ही देश का एक मात्र ऐसा टाइगर रिजर्व है, जहां सबसे ज्यादा प्रजातियों के वन्यजीवों की दुनिया आबाद है। नभचर के रूप में यहां रंग बिरंगे परिंदे दुधवा को खूबसूरत बनाते हैं तो बाघ, तेंदुआ, हाथी, गैंड़ा, विभिन्न प्रजातियों के हिरन भालू समेत अनेक दुर्लभ वन्यजीवों का विचरण यहां आसानी से देखा जा सकता है। मगरमच्छ, घड़ियाल और कई प्रजातियों की मछलियां जलीय जैव विविधता को समृद्घ बनाती हैं। दुधवा में चल रही गैंडा पुनर्वासन परियोजना देश की विलक्षण परियोजना है। असम से लाए गए पांच गैंडों से 1984 में शुरू की गई गैंडा पुनर्वासन योजना में अब गैंडा परिवार की संख्या बढ़कर 48 हो गई है।
दुधवा में 51 प्रजातियों के स्तनधारी जीव, रेप्टाइल की 25 प्रजातियों के अलावा 410 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। यहां 75 प्रजातियों के वृक्ष, 21 प्रकार की झाड़ियां, 17 प्रकार की बेल और लताएं, 77 प्रजातियों की घासें और 179 प्रजातियों के जलीय पौधे हैं, जो यहां की जैव और वानस्पतिक विविधता को समृद्ध बनाते हैं। 2018 में हुई बाघों की गणना के दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व में 117 बाघ पाए गए थे। इससे पहले इनकी संख्या 105 थी। जबकि तेंदुओं की संख्या 150 अनुमानित की गई थी। करीब 225 जंगली हाथी और 46 गैंडे पाए गए थे।
इन प्रमुख वन्यजीवों के अलावा 179 फिशिंग कैट, 3344पाढ़ा, 5515 नीलगाय, 316 सांभर, 21199 चीतल, 2538 बारासिंघा, 1270 काकड़, 141 भालू, 14413 जंगली सुअर, 23754 बंदर, 12560 लंगूर, 595मगरमच्छ, 122 घड़ियाल, 464 भेड़िया, 236 लोमड़ी, 2849 सियार, 460 जंगली बिल्ली, 376 बिज्जू, 669 सेही, 1172 गोह, और 266 खरगोश हैं। इसके अलावा दुर्लभ प्रजाति का बंगाल फ्लोरिकन पक्षी भी दुधवा में पाया जाता है। इनकी संख्या भी बढ़कर करीब 80 तक पहुंच गई है, जो दुधवा की एक विशेषता है। दुधवा के फील्ड डायरेक्टर के मुताबिक पिछली गणना की अपेक्षा वन्यजीवों की संख्या में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।